हमारा लोकतंत्र ICU में है, इसे बचाने की जिम्मेदारी हमारी है- प्रशांत भूषण

हमारा लोकतंत्र ICU में है।
इसे बचाने की जिम्मेदारी हमारी है।
इसके लिए हमें कष्ट उठाने होंगे। सड़कों पर उतरना होगा।जेल जाने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा। सुविधापूर्वक जीवन जीते हुए परिवर्तन की कामना से इसे बचा पाना मुश्किल होगा।जिस तरह गांधीजी ने लोगों से आह्वान कर उन्हें त्याग के लिए तैयार किया ,वैसी ही जरूरत आज भी है।
कल अजमेर में पी यू सी एल और अजयमेरू प्रेस क्लब के तत्वावधान में
सुप्रसिद्ध विधिवेत्ता और जन न्यायिक अधिकारों के प्रति समर्पित कार्यकर्ता
प्रशांत भूषण के “हमारे लोकतंत्र का भविष्य” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। प्रशांत भूषण ने उपरोक्त विचार व्यक्त करते हुए हमारे लोकतंत्र पर खतरों को बिंदुवार स्पष्ट किया और सावचेत किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव नहीं बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और न्यायपालिका की स्वतंत्रता भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
ये सभी आज के समय में अपने आपको बचाने के लिए जूझ रहे हैं। उन्होंने चुनाव प्रणाली में सुधार की वकालत की और कहा कि वर्तमान व्यवस्था अधिक वोट पाने वाले को सर्वेसर्वा बना देती है जबकि
लोकतंत्र में उससे कम वोट पाने वाले दल की भी भागीदारी व भूमिका होनी चाहिए।
चुनावों में खर्चीले प्रचार और धन व बल के हस्तक्षेप को रोकने का उपाय हम खोज नहीं पाए हैं। विधायकों और सांसदों को खरीद के बाद तो मतदाता के वोट का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता है। उन्होंने कहा कि एस आई आर गैरकानूनी है और इसके माध्यम से लाखों लोगों को मताधिकार से वंचित किया जा रहा है।
मत का अधिकार नहीं होगा तो चुनाव सही और लोकतंत्र ठीक कैसे कहा जा सकता है?
मीडिया हाउस की खरीद के बाद स्वतंत्र प्रेस की अवधारणा समाप्त हो गई है। प्रेस ने जनता की पक्षधरता के स्थान पर सरकार का लाउडस्पीकर बनना स्वीकार कर लिया है। इस दुखद स्थिति में सोशल मीडिया एक उम्मीद की लौ सामने लेकर आया है। किंतु सरकार ने अपनी विरोधी
पोस्ट को रुकवाने,हटवाने के कई तरीके खोज निकाले हैं। स्वतंत्र पत्रकारों को भी
तरह तरह से परेशान किया जा रहा है।
संवैधानिक संस्थाओं का जिस तरह से खुलेआम दुरुपयोग हो रहा है,वह शर्मनाक है। सी बी आई, ई डी,इलेक्शन कमीशन
सरकारी एजेंसियों की तरह काम कर रहे हैं और इनका इस्तेमाल प्रतिपक्ष के नेताओं को डराने,फंसाने और हथियाने के लिए किया जा रहा है।
इन स्थितियों के निराकरण के लिए हमारी उम्मीदें न्यायपालिका से ही लगती हैं। किंतु दुर्भाग्य से देश का सर्वोच्च न्यायालय भी आई सी यू में ही है।सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति में कॉलेजियम की सिफारिशों को देरी कर नकारा जा रहा है।आने वाले समय में सर्वोच्च न्यायालय में सरकार समर्थित न्यायाधीश ही बचेंगे और वे ही आने वाले न्यायाधीश चुना करेंगे। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति पश्चात् उपकृत किए जाने की प्रवृति को भी घातक बतलाया।
प्रशांत भूषण के व्याख्यान के प्रति भारी उत्साह देखा गया। कार्यक्रम में वकील,पत्रकार,शिक्षाविद्,सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा युवाओं की भागीदारी रही।सवाल जवाब के सत्र में भी महत्वपूर्ण चर्चा हुईं।
कार्यक्रम में पी यू सी एल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव,एन एफ आई डब्ल्यू की राष्ट्रीय महासचिव निशा सिद्धू,
पद्मश्री सी पी देवल,पूर्व जिला प्रमुख सत्यकिशोर सक्सेना,पूर्व विधायक डॉ श्रीगोपाल बाहेती सहित अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ अनंत भटनागर ने प्रशांत भूषण का परिचय दिया और प्रेस क्लब के अध्यक्ष डॉ रमेश अग्रवाल ने विषय प्रवर्तन किया। संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रताप सनकत ने किया व सी पी कटारिया ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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