*माननीय उच्चतम न्यायालय का निर्णय: आवेदन की अंतिम तिथि तक डिग्री होना अनिवार्य, बीच में नहीं बदल सकते नियम*
अजमेर, 5 मई। माननीय उच्चतम न्यायालय ने सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती 2024 मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग की अपील को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि इस भर्ती के तहत शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने की निर्णायक तिथि आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि ही होगी। इस फैसले के साथ ही शीर्ष अदालत ने राजस्थान उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें अंतिम वर्ष के छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी।
_*क्या था पूरा मामला?*_
आरपीएससी ने 7 मार्च 2024 को सहायक अभियोजन अधिकारी के 181 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें लॉ में स्नातक की डिग्री अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता रखी गई थी। इस भर्ती में कई ऐसे अभ्यर्थियों ने भी आवेदन कर दिया था जिनकी डिग्री आवेदन की अंतिम तिथि तक पूरी नहीं हुई थी। बाद में आयोग ने प्रेस नोट जारी कर स्पष्ट किया कि जिनके पास अंतिम तिथि तक योग्यता नहीं है, वे अपना आवेदन वापस ले लें।
इसे अभ्यर्थियों ने राजस्थान उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय की एकल और खंडपीठ ने अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि यदि परीक्षा की तिथि तक डिग्री मिल जाती है, तो उन्हें पात्र माना जाना चाहिए। इसी निर्णय के विरुद्ध आरपीएससी ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
_*सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां:*_
नियमों में बदलाव नहीं: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि राजस्थान अभियोजन अधीनस्थ सेवा नियम, 1978 के नियम 12 से वह प्रावधान अक्टूबर 2002 में ही हटा दिया गया था, जो अंतिम वर्ष के छात्रों को छूट देता था।
स्पष्ट व्याख्या: अदालत ने माना कि विज्ञापन की भाषा बिल्कुल स्पष्ट थी, जिसके अनुसार योग्यता का आकलन आवेदन के समय उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही किया जाता है।
प्रशासनिक सुगमता: न्यायालय ने कहा कि यदि इंटरव्यू तक योग्यता हासिल करने की छूट दी गई, तो इससे चयन प्रक्रिया में अनिश्चितता आएगी और आयोग पर अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ पड़ेगा।
*भर्ती प्रक्रिया पर प्रभाव*
आयोग सचिव ने बताया कि इस फैसले के बाद अब केवल वही अभ्यर्थी सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती में सम्मिलित रहेंगे, जिनके पास आवेदन की अंतिम तिथि तक विधि स्नातक की डिग्री उपलब्ध थी। न्यायालय ने उच्च न्यायालय के एकल एवं खंडपीठ के उन आदेशों को अपास्त कर दिया है, जिसने अपात्र अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी थी।