डाटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी एवं एआई कोर्स होंगे शुरू
बढ़ती शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय में अंग्रेजी एवं संस्कृत विषय में नए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की तैयारी
विश्वविद्यालय में एल.एम.एस. (Learning Management System) को अतिशीघ्र प्रारंभ
कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा — “विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी प्रत्येक प्रक्रिया मिशन मोड में पूरी की जाए”
अजमेर।
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के समस्त विभागाध्यक्षों, अधिष्ठाताओं, अधिकारियों एवं संबंधित कर्मचारियों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बृहस्पति भवन स्थित अशोक कक्ष में आयोजित की गई। बैठक में विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम, छात्रावास व्यवस्था, डिजिटल शिक्षा, नए रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम, शोध गतिविधियों, स्वच्छ परिसर एवं छात्र सुविधाओं से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक को संबोधित करते हुए कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विश्वविद्यालय का शैक्षणिक सत्र पूर्णतः नियमित बनाया जाए तथा सभी विभाग 30 जून तक अपना पाठ्यक्रम पूर्ण करें। उन्होंने परीक्षा शाखा को निर्देशित किया कि विश्वविद्यालय की समस्त परीक्षाओं के परिणाम 31 जुलाई तक हर स्थिति में घोषित किए जाएं, ताकि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
कुलगुरु ने कहा कि वर्तमान समय विद्यार्थियों तक विश्वविद्यालय की पहुँच बढ़ाने का है, इसलिए प्रवेश प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्नातक, एमबीए एवं अन्य प्रमुख पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को प्रवेश अभियान मिशन मोड में चलाना होगा। इसके लिए सभी विभागों को 10 मई तक अपने विभागों के पोस्टर एवं डिजिटल सामग्री मिश्रित हिंदी-अंग्रेजी भाषाओं में तैयार कर विश्वविद्यालय के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विद्यार्थियों को आधुनिक एवं बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने हेतु विश्वविद्यालय के छात्रावासों को पूर्ण रूप से व्यवस्थित किया जाएगा। गार्गी एवं अपाला छात्रावास की व्यवस्था प्रो. ऋतु माथुर के नेतृत्व में संचालित होगी, जबकि डॉ. रोहिणी अग्रवाल सहयोगी के रूप में कार्य करेंगी। नचिकेता छात्रावास की जिम्मेदारी डॉ. आशीष पारीक को सौंपी गई तथा प्रो. अरविंद पारीक को मुख्य वार्डन नियुक्त किया गया। कुलगुरु ने निर्देश दिए कि 30 जून तक सभी छात्रावासों में आवश्यक फर्नीचर, सुरक्षा व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत एवं अन्य मूलभूत सुविधाएँ सुनिश्चित कर दी जाएं, ताकि नए विद्यार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
बैठक में विद्यार्थियों के लिए नए रोजगारोन्मुखी एवं तकनीकी पाठ्यक्रम प्रारंभ करने पर भी विशेष चर्चा हुई। विश्वविद्यालय में एम.एससी. डाटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्किल कोर्स प्रारंभ करने की दिशा में कार्यवाही तेज करने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त “फिनिशिंग स्कूल” की स्थापना कर विद्यार्थियों को पर्सनालिटी डेवलपमेंट, कम्युनिकेशन स्किल्स एवं रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की योजना पर भी सहमति बनी। कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि विश्वविद्यालय में कंप्यूटर आधारित आधुनिक शैक्षणिक एवं प्रशासनिक प्रणालियों को शीघ्र लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में एल.एम.एस. (Learning Management System) को अतिशीघ्र प्रारंभ करने की दिशा में कार्य तेजी से किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षण सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। इसके साथ ही शोध कार्यों को अधिक सुव्यवस्थित एवं तकनीकी रूप से सशक्त बनाने हेतु आरएफआईडी (RFID) आधारित सिस्टम भी शीघ्र स्थापित किया जाएगा। कुलगुरु ने यह भी जानकारी दी कि विद्यार्थियों की बढ़ती शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय में अंग्रेजी एवं संस्कृत विषय में नए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की तैयारी की जा रही है।
कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने “लर्न, अर्न एंड परफॉर्म” योजना को विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से जरूरतमंद विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ-साथ कार्य के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों को विद्यार्थियों की प्रतिभा एवं कौशल के अनुरूप कार्य अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
बैठक में विश्वविद्यालय परिसर की स्वच्छता, कैफेटेरिया संचालन, डिजिटल लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS), रिसर्च प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने तथा NSS गतिविधियों को अधिक सक्रिय एवं प्रभावी बनाने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कुलगुरु ने कहा कि विश्वविद्यालय का वातावरण विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी एवं सुविधाजनक होना चाहिए तथा प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी को छात्र हित सर्वोपरि रखते हुए कार्य करना होगा। बैठक में शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बड़े शोध प्रोजेक्ट लाने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहन राशि देने की योजना पर भी चर्चा की गई। साथ ही अंतरविषयी शोध एवं भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया।
बैठक में प्रो. ऋतु माथुर, प्रो. सुभाष चंद्र, प्रो. आशीष भटनागर, प्रो. सुब्रतो दत्ता, प्रो. मोनिका भटनागर, प्रो. अरविंद पारीक, डॉ. आशीष पारीक, डॉ. दीपिका उपाध्याय, डॉ. अश्विनी तिवारी, कुलसचिव श्री कैलाश चंद्र शर्मा, वित्त नियंत्रक सुश्री नेहा शर्मा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुनील कुमार टेलर, श्री विनोद कुमार जैन, श्री सूरजमल राव, श्री तपेश्वर कुमार, सुश्री इति श्री, डॉ. लारा शर्मा, डॉ. असीम जयंती देवी, श्री एच.एस. जाखड़, श्री विन्सेंट फिलिप्स, श्री वैभव खन्ना, डॉ॰ विवेक पारीक, डॉ कल्पना सोनी, डॉ. रोहिणी अग्रवाल, श्री राजेंद्र तिवारी, श्री सीताराम जोशी एवं मुख्य सुरक्षा अधिकारी श्री धन्नालाल सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।