आनासागर झील के वैज्ञानिक सीमांकन और संरक्षण की दिशा में केंद्र सरकार का बड़ा कदम

अजमेर। आनासागर झील के अस्तित्व को बचाने और इसके वैज्ञानिक सीमांकन (Demarcation) के लिए लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों को एक बड़ी सफलता मिली है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) ने आनासागर झील के वैज्ञानिक सीमांकन, गाद (मिट्टी) निष्कासन और वास्तविक वेटलैंड सीमा के निर्धारण के संबंध में गौरवपथ संघर्ष समिति से प्राप्त शिकायत पर कड़ा संज्ञान लिया है।
मंत्रालय के वेटलैंड्स डिवीजन द्वारा जारी कार्यालय पत्र (F. No. W-12/02/2024-WTL) के माध्यम से राजस्थान राज्य वेटलैंड प्राधिकरण (RSWA) के सदस्य सचिव को इस मामले में प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने हेतु निर्देशित किया गया है।
मुख्य निर्देश और नियम:
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वेटलैंड्स (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत राज्य सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह:
1. डिजिटल मैप और सटीक कोऑर्डिनेट्स के माध्यम से वेटलैंड की सीमा का निर्धारण करे।
2. वेटलैंड के ‘प्रभाव क्षेत्र’ (Zone of Influence) और लैंड यूज (Land Use) को स्पष्ट रूप से चिह्नित करे।
3. झील के पारिस्थितिक चरित्र (Ecological Character) और वहां के पूर्व-विद्यमान अधिकारों एवं विशेषाधिकारों का विवरण तैयार करे।
कार्रवाई की समय सीमा:
भारत सरकार ने राजस्थान राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को निर्देशित किया है कि शिकायतकर्ता द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर प्राथमिकता (Priority Basis) के आधार पर कार्रवाई की जाए। साथ ही, मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि इस मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (Action Taken Report) सीधे आवेदक को भेजी जाए और उसकी एक प्रति केंद्रीय मंत्रालय को भी प्रेषित की जाए।
यह कदम अजमेर की ऐतिहासिक धरोहर आनासागर झील को अतिक्रमण मुक्त करने और इसके वैज्ञानिक संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
Anshu j p
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