राजस्थान में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों में शिक्षा विभाग की नई बिड प्रक्रिया को लेकर नाराजगी बढ़ गई है। प्रशिक्षकों का कहना है कि वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। सरकार और विभाग फिर से ठेका आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं। इससे हजारों प्रशिक्षकों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।
व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति के महिला मंत्री अजमेर पूनम लवासिया ने बताया कि राज्यभर के 80 से अधिक विधायक, सांसद, अन्य
जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री को पत्र लिख चुके हैं। पत्र में व्यावसायिक प्रशिक्षकों की समस्याओं के समाधान की अनुशंसा की गई। स्थायी नीति बनाने की मांग रखी गई। बावजूद सरकार स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ। विभाग स्तर पर भी फैसला नहीं आया। हजारों प्रशिक्षक कई वर्षों से अस्थिर रोजगार की स्थिति में हैं। वेतन भुगतान में देरी होती है। सेवा सुरक्षा नहीं है। भविष्य अनिश्चित है। उनका कहना है कि कौशल शिक्षा मजबूत करने के बजाय ठेका आधारित मॉडल को बार-बार बढ़ावा मिल रहा हैं, इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित
हो रही है। प्रशिक्षकों का मनोबल भी गिर रहा है। प्रशिक्षकों ने नई बिड प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पहले भी ठेका व्यवस्था, उससे जुड़ी प्रक्रियाओं पर कई स्तरों पर आपत्तियां आईं। फिर भी नई बिड किस आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, अनियमितताओं की शिकायतें लगातार होती रही हैं, उन मामलों पर विभाग का मौन चिंता बढ़ाता है। संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष आर एन रावत ने कहा कि सरकार को कौशल शिक्षा व्यवस्था के लिए दीर्घकालिक नीति लागू
करनी चाहिए। स्थायी नीति जरूरी है। उन्होंने कहा कि मांग सिर्फ रोजगार सुरक्षा की नहीं है। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण कौशल शिक्षा मिले, यह भी मांग है।
जिन कंपनियों का 13 महीना का पेमेंट बकाया चल रहा है उनको टेंडर देने का विचार करना विभाग कि मनसा पर प्रश्न उठाने कि स्थित है अखिर विभाग क्या चाहता है
समिति के दीपक वैष्णव ने कहा कि सरकार “कौशल भारत-कुशल भारत” का सपना दिखा रही है। दूसरी ओर कौशल शिक्षा देने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षक ठेका प्रथा में शोषण की स्थिति में हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को ठेका व्यवस्था के भरोसे चलाना कैसे उचित है। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा
व्यवस्था को ठेका प्रथा से मुक्त करना चाहिए। गुणवत्ता सुधार की दिशा में कदम उठाने चाहिए। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो राज्यभर में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन होगा। जनजागरण अभियान भी चलाया जाएगा। जरूरत पड़ी तो प्रशिक्षक उच्च न्यायालय जाएंगे। प्रशिक्षकों ने सरकार से पारदर्शी निर्णय लेने की मांग की। स्थायी रोजगार नीति लागू करने की मांग की। व्यावसायिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग दोहराई।