*बी.फार्म एवं डी.फार्म पाठ्यक्रमों में 60-60 सीटों पर होगा प्रवेश, विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में मिलेगी गुणवत्तापूर्ण व्यावसायिक शिक्षा*
अजमेर। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर ने रोजगारोन्मुख एवं व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्यरत वैधानिक संस्था भारतीय भेषजी परिषद (Pharmacy Council of India – PCI), नई दिल्ली ने विश्वविद्यालय को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से फार्मेसी पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस स्वीकृति के साथ विश्वविद्यालय प्रदेश के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण फार्मेसी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है।
भारतीय भेषजी परिषद द्वारा विश्वविद्यालय में संचालित किए जाने वाले दो प्रमुख व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें बैचलर ऑफ फार्मेसी (B.Pharm) चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम तथा डिप्लोमा इन फार्मेसी (D.Pharm) दो वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम शामिल हैं। परिषद द्वारा दोनों पाठ्यक्रमों में 60-60 प्रवेश सीटों की अनुमति प्रदान की गई है। इसके अनुसार बी.फार्म पाठ्यक्रम में प्रति वर्ष 60 विद्यार्थियों तथा डी.फार्म पाठ्यक्रम में 60 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जा सकेगा।
प्रभारी प्रो. अरविंद पारीक ने इस स्वीकृति को क्षेत्रीय उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। अब अजमेर संभाग सहित राजस्थान के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं मान्यता प्राप्त फार्मेसी शिक्षा के लिए अन्य शहरों या राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा, बल्कि उन्हें अपने ही क्षेत्र में राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर उपलब्ध होगा। वर्तमान समय में फार्मेसी शिक्षा स्वास्थ्य एवं औषधि क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। फार्मेसी पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थी केवल दवा निर्माण और वितरण तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पताल प्रबंधन, क्लीनिकल रिसर्च, फार्मास्युटिकल उद्योग, मेडिकल रिप्रेजेंटेशन, दवा गुणवत्ता नियंत्रण, फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग, ड्रग रेगुलेटरी अफेयर्स, फार्माकोविजिलेंस, अनुसंधान एवं विकास तथा उद्यमिता के क्षेत्र में भी व्यापक रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं। तेजी से विकसित हो रहे स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षित फार्मेसी पेशेवरों की मांग निरंतर बढ़ रही है, जिससे यह क्षेत्र विद्यार्थियों के लिए अत्यंत आकर्षक एवं संभावनाशील बन गया है।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के हित में है जो रोजगारपरक एवं व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त कर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप कौशल आधारित, उद्योगोन्मुख तथा बहु-विषयक शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय लगातार नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने और विद्यार्थियों को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है।
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने भारतीय भेषजी परिषद द्वारा प्राप्त इस स्वीकृति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि, “विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, कौशल आधारित एवं उद्योगोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। फार्मेसी पाठ्यक्रमों की स्वीकृति इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हमारा उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को ऐसा ज्ञान, कौशल और व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है जो उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए।”
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में फार्मेसी शिक्षा के लिए आवश्यक सभी आधारभूत सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। विद्यार्थियों को आधुनिक प्रयोगशालाओं, उन्नत उपकरणों, अनुभवी एवं योग्य संकाय सदस्यों तथा अनुसंधान आधारित शिक्षण वातावरण का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही औषधि उद्योगों, अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थानों के साथ प्रशिक्षण एवं इंटर्नशिप सहयोग विकसित किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके तथा वे उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।
कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय भविष्य में स्वास्थ्य विज्ञान एवं व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में अन्य नवीन पाठ्यक्रमों के संचालन की संभावनाओं पर भी कार्य कर रहा है, जिससे विद्यार्थियों को बदलती वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।
भारतीय भेषजी परिषद द्वारा प्रदान की गई यह स्वीकृति विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, संस्थागत क्षमता तथा व्यावसायिक शिक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यह उपलब्धि न केवल विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है, बल्कि अजमेर एवं आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए भी नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाली है।
प्रो. पारीक ने जानकारी दी है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इन दोनों पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया प्रारम्भ की जाएगी। इच्छुक अभ्यर्थियों एवं उनके अभिभावकों से विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट एवं प्रवेश पोर्टल पर उपलब्ध सूचनाओं का नियमित अवलोकन करने का आग्रह किया गया है, ताकि प्रवेश प्रक्रिया, पात्रता, शुल्क संरचना एवं अन्य आवश्यक जानकारियों से समय पर अवगत हुआ जा सके।