
राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल समझौता केवल दो राज्यों के बीच हुआ एक प्रशासनिक करार नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के वर्षों पुराने जल अधिकार के संघर्ष को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक निर्णय है।
यह वह क्षण है जिसका इंतजार प्रदेश की कई पीढ़ियाँ करती रही हैं। दशकों से पूर्वी राजस्थान के किसानों, पशुपालकों और आम नागरिकों की सबसे बड़ी अपेक्षा थी कि उन्हें यमुना के जल में उनका न्यायोचित हिस्सा मिले।
आज मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में यह सपना साकार होने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा है।
राजस्थान का दावा कोई नया नहीं था। वर्षों से राज्य सरकारें यमुना जल में हिस्सेदारी की बात उठाती रहीं, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रभावी संवाद के अभाव में यह विषय फाइलों तक सीमित रहा। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक घोषणा नहीं बनाया, बल्कि हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार के साथ सकारात्मक संवाद, विश्वास और समन्वय स्थापित कर इसे परिणाम तक पहुँचाया। इसके लिए वे बधाई और पूरे प्रदेश की ओर से आभार के पात्र हैं।
यह समझौता पूर्वी राजस्थान के लिए नई आशा लेकर आया है। इससे पेयजल संकट से जूझ रहे अनेक शहरों और कस्बों को राहत मिलने की संभावना मजबूत होगी। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, भूजल पर निर्भरता कम होगी और गिरते जलस्तर को संभालने में मदद मिलेगी। उद्योगों के लिए भी जल उपलब्धता बेहतर होने से निवेश और रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा का मजबूत आधार तैयार होगा।
भजनलाल शर्मा सरकार ने यह सिद्ध किया है कि यदि नेतृत्व में इच्छाशक्ति हो तो वर्षों से लंबित विषय भी समाधान तक पहुँच सकते हैं। यह समझौता राजनीति से ऊपर उठकर विकास, सहयोग और सुशासन का उदाहरण है। हरियाणा सरकार का भी अभिनंदन किया जाना चाहिए कि उसने सकारात्मक सोच के साथ इस ऐतिहासिक पहल को आगे बढ़ाया।
यही सहकारी संघवाद की वास्तविक भावना है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि इस समझौते का लाभ समयबद्ध तरीके से धरातल पर दिखाई दे। जल परिवहन और वितरण की आधारभूत संरचना तेजी से विकसित हो, परियोजनाओं को गति मिले और प्रत्येक बूंद का वैज्ञानिक उपयोग सुनिश्चित किया जाए। यदि ऐसा हुआ तो आने वाले वर्षों में पूर्वी राजस्थान का सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य बदल सकता है।
यमुना का यह जल केवल नहरों में बहने वाला पानी नहीं होगा, बल्कि यह किसानों की समृद्धि, युवाओं के भविष्य, उद्योगों की प्रगति और राजस्थान के विकास का नया प्रवाह बनेगा।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक पहल आने वाले समय में राजस्थान के विकास के स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद की जाएगी।
—