अजमेर, 24 जुलाई। ग्राहृय परीक्षण केन्द्र के उप निदेशक कृषि (शस्य) श्री मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि खरीफ मौसम में मूंग, मोठ, चंवला तथा उड़द प्रमुख दलहनी फसलें हैं। इन फसलों पर विभिन्न कीट एवं रोगों का प्रकोप देखा जाता है। वर्तमान समय में मूंग की फसल में पीला मोजेक रोग का प्रकोप बढ़ रहा है, जो एक विषाणु (वायरस) जनित रोग है। यह रोग मूंग के अलावा मोठ, उड़द जैसी दलहनी फसलों को भी प्रभावित करता है। इससे उत्पादन में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
कार्यालय के सहायक कृषि अनुसंधान अधिकारी (कीट) डॉ. सुरेश चौधरी ने बताया कि इस रोग के लक्षणों में पत्तियों पर चितकबरे पीले धब्बे दिखाई देना, पत्तियों का सिकुड़ना, फलियों का विकृत होना तथा फलियों की संख्या कम होना शामिल है। यदि रोग का संक्रमण फसल की शुरुआती अवस्था में हो जाए, तो पौधों की वृद्धि रुक सकती है। यह रोग मुख्य रूप से सफेद मक्खी जैसे रस चूसक कीटों द्वारा फैलता है।
रोग के प्रभावी नियंत्रण के लिए संक्रमित पौधों को खेत से निकालकर नष्ट कर दें। साथ ही रोग वाहक रस चूसक कीटों के नियंत्रण हेतु प्रति हेक्टेयर 150 मिलीलीटर इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल अथवा 200 ग्राम फ्लोनीकामिड 50 प्रतिशत डब्ल्यूजी अथवा एक लीटर डायमिथोएट 30 ईसी का घोल बनाकर छिड़काव करें। दूसरा छिड़काव 15 दिन के अंतराल पर करें। छिड़काव के दौरान दस्ताने, मास्क एवं पूरे सुरक्षा वस्त्र पहनें तथा केवल साफ और शांत मौसम में ही कृषि रसायनों का उपयोग करें।