“समाज में संस्कार स्थापित करने का दायित्व साहित्यकार का है” — डॉ विपिन पाठक
अजमेर/महर्षि श्रीकृष्ण द्वैपायन वेदव्यास की जयंती के उपलक्ष्य पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद अजमेर द्वारा रविवार को वरिष्ठतम महिला साहित्य गुरु छांदस काव्य की मर्मज्ञ पुष्पा शर्मा कुसुम और हिंदी गीतिकाव्य में सिद्ध डॉ शकुंतला तंवर को उनके निवास पर जाकर “पुरोधा साहित्यकार सम्मान” से सम्मानित किया। परिषद गीत से आरंभ कार्यक्रम में मुख्य वक्ता क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ विपिन चंद्र पाठक ने कहा कि समाज में संस्कार स्थापित हों यह साहित्यकार का दायित्व है। उन्होंने कहा कि देश में व्याप्त विघटनकारी गतिविधियां के प्रति सावचेत रहते हुए सार्थक और सकारात्मक संदेश देने वाले लेखन की आज आवश्यकता है। अध्यक्षता कर रहे प्रदेश संयोजक उमेश कुमार चौरसिया ने वेदव्यास जी से लोकहितकारी साहित्य सृजन को प्रेरणा लेने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि कुलदीप सिंह रत्नू , अध्यक्ष डॉ कृष्ण कुमार शर्मा और महामंत्री विष्णु दत्त शर्मा ने भी विचार रखे।
कार्यक्रम संयोजक बनवारीलाल शर्मा ने बताया कि पुष्पा शर्मा कुसुम ने विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली भारत को जानो व भारत का संविधान कृतियों में उनके रचित छंद और शिव एवं श्रीकृष्ण पर केंद्रित छंद काव्य सुनाया। डॉ शकुंतला तंवर ने 56 से अधिक पत्रिकाओं में प्रकाशित रचनाओं का उल्लेख करते हुए सारा गीत सुनाए। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष गंगाधर शर्मा, डाॅ छाया शर्मा ,गोविन्द भारद्वाज, डाॅ सुधा मित्तल, कविता जोशी, सोनू सिंघल, पुष्पा क्षेत्रपाल और डाॅ राजेश शर्मा ने पुरोधा महिला साहित्यकारों को शाॅल, श्रीफल व स्मृति चिह्न देकर अभिनंदन किया। कल्याण मंत्र से कार्यक्रम संपन्न हुआ।