आयोग के कड़े रुख एवं तथ्यात्मक जवाब के चलते याचिकाकर्ता ने वापस ली याचिका
अजमेर, 14 अगस्त। माननीय उच्च न्यायालय, जयपुर की एकलपीठ द्वारा आज असिस्टेंट प्रोफेसर (काॅलेज शिक्षा विभाग) भर्ती-2025 से जुड़ी धर्मवीर मीणा की याचिका पर सुनवाई हुई। मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग के अधिवक्ता एम.एफ बेग द्वारा न्यायालय के समक्ष विस्तृत जवाबदावा पेश किए जाने एवं गलत तथ्य प्रस्तुत करने के कारण धर्मवीर मीणा के विरुद्ध शास्ति (जुर्माना) आरोपित करने की मांग के बाद, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अपनी रिट याचिका वापस ले ली है। इसके साथ ही कॉलेज शिक्षा में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती को लेकर चल रहे सभी विवाद समाप्त हो गए हैं और भर्ती का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो गया है।
भर्ती एवं साक्षात्कार प्रक्रिया रही निर्बाध
माननीय न्यायालय द्वारा 30 जुलाई 2026 को दिए गए पूर्व के निर्णय (अंतरिम आदेश) के परिप्रेक्ष्य में आयोग द्वारा उक्त भर्ती के तहत साक्षात्कार हेतु सफल अभ्यर्थियों के परिणाम निरंतर जारी कर भर्ती एवं साक्षात्कार प्रक्रिया को बाधित नहीं होने दिया गया।
आयोग ने माननीय न्यायालय से की शास्ति लगाने की मांग
इस प्रकरण में आयोग ने बेहद कड़ा रुख अपनाया। आयोग ने माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत अपने जवाब में स्पष्ट किया कि याची द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष भ्रामक और गलत तथ्य प्रस्तुत कर भर्ती प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया गया है। आयोग ने माननीय न्यायालय से निवेदन किया कि गलत तथ्य प्रस्तुत करने और बिना आधार के माननीय न्यायालय का महत्वपूर्ण समय व्यर्थ करने के कारण याची के ऊपर शास्ति लगाई जाए।
क्या था पूरा प्रकरण, अंतरिम आदेश और आयोग का जवाब?
- मूल प्रकरणः- यह मामला एस.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 13640/2026 (धर्मवीर मीणा एवं अन्य बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य) से जुड़ा था।
- अंतरिम आदेशः- इस मामले में 30 जुलाई 2026 को माननीय उच्च न्यायालय की एकलपीठ द्वारा याचिकाकर्ता के पक्ष में अंतरिम आदेश पारित किया गया था।
- आयोग की त्वरित कार्रवाईः- इस अंतरिम आदेश को निरस्त करवाने के लिए आयोग द्वारा संविधान के अनुच्छेद 226(3) के तहत स्टे वेकेशन एप्लीकेशन एवं जवाबदावा प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय में आयोग का पक्ष
- आयोग ने माननीय न्यायालय को अवगत कराया कि याचिकाकर्ता की याचिका और स्टे एप्लीकेशन में उल्लेखित तथ्य पूर्णतः भ्रामक हैं।
- उक्त भर्ती का विज्ञापन (दिनांक 18.09.2025), कार्मिक विभाग की अधिसूचना (दिनांक 21.07.2025) के बाद जारी किया गया था।
- कार्मिक विभाग की अधिसूचना दिनांक 21.7.2025 के अनुसार सेवा नियमों में संशोधन कर अतिरिक्त पदों की वृद्धि सीमा को 50ः से बढ़ाकर 100ः कर दिया गया था।
- ऐसे में, 574 पदों के मूल विज्ञापन के विरुद्ध 348 पदों की वृद्धि (कुल 922 पद) के लिए 13.05.2026 को जारी किया गया शुद्धि पत्र और उक्त भर्ती के अंतर्गत की गई पदों की वृद्धि पूर्णतया नियमानुसार थी।
भूल स्वीकारते हुए याचिका की विदड्रा
यह स्पष्ट हो गया कि याची द्वारा माननीय न्यायालय के समक्ष पूर्णतः गलत तथ्य प्रस्तुत किए गए थे। न्यायालय में आयोग के अधिवक्ता द्वारा इन पुख्ता तथ्यों को रखे जाने के बाद याचिकाकर्ता के पास कोई वैधानिक आधार नहीं बचा, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने भूल स्वीकारते हुए तत्काल अपनी याचिका वापस ले ली।
भर्तियों को निर्बाध रखने के लिए आयोग के दूरगामी कदम एवं निगरानी
बड़े भर्ती प्रकरणों में दायर होगी कैविएट
निर्बाध भर्ती प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करने के लिए आयोग अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह के निर्देशों पर आयोग द्वारा एक बड़ा सुरक्षात्मक कदम उठाया गया है। यह निर्णय लिया गया है कि भविष्य में एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों वाली सभी भर्तियों के अंतर्गत माननीय न्यायालय में पूर्व में ही कैविएट दायर की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर अकारण भर्ती प्रक्रिया बाधित न हो सके।
आयोग अध्यक्ष के सैन्य एवं विधिक अनुभव का मिल रहा लाभ
वर्तमान में आयोग के लगभग 3000 न्यायिक प्रकरण माननीय न्यायालयों में लंबित हैं। इनके त्वरित एवं समुचित निस्तारण के लिए आयोग अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह द्वारा प्रत्येक केस को आयोग की लीगल टीम के साथ व्यक्तिगत रूप से डिस्कस किया जा रहा है, जिससे न्यायालय में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जा सके।
उल्लेखनीय है कि आयोग अध्यक्ष श्री सिंह को भारतीय सेना के अंतर्गत 51 सब एरिया, गुवाहाटी की विधि शाखा में कार्य करने का लंबा अनुभव प्राप्त है। उनके इसी विधिक अनुभव और रणनीतिक निर्देशन का सीधा लाभ अब आयोग की कानूनी सफलता में देखने को मिल रहा है।