अजमेर / दो बारातें शादी के बाद नदी के रास्ते नौका में लौट रही थीं कि अचानक भयानक तूफान में नौका डूब जाती है। जान बचाने वालों में रमेष दूसरी बारात की ब्याहता कमला को अपने साथ ले आता है और उसका वास्तविक पति उसे खोजता फिरता है। बाद में रमेष के साथ कमला को देख उसकी हेम से होने वाली शादी टूट जाती है और उधर हेम से ही कमला के पति नलिनाक्ष के विवाह की बात चल पडती है। कमला का अनेक स्थानों पर भटकना, अत्याचार सहना, नलिनाक्ष का हेम से विवाह के लिए इंकार करना और अंत में उसका कमला से उसी के घर में मिलना, फिर सबकुछ सही होने पर नाटक के सुखांत के आकर्षक दृष्योें ने दर्षकों को खासा प्रभावित किया। हरेक घटना को उभारता सटीक संगीत और संजीदगी से परिपूर्ण सार्थक-प्रभावी संवादों ने एक गंभीर कथानक के नाटक में भी दर्षकों को अंत तक बांधे रखा। राजस्थान संगीत नाटक अकादमी द्वारा नाट्य निर्माण योजना के तहत स्थानीय जवाहर रंगमंच पर प्रख्यात रंगकर्मी सरताज नारायण माथुर द्वारा रचित एवं निर्देषित बहुचर्चित नाटक ‘नौका डूबी‘ का मंचन अजमेर के प्रेक्षकों के लिए नया अनुभव लेकर आया। रवीन्द्रनाथ टैगोर के उपन्यास पर आधारित नाटक को जयपुर के नाट्य दल ‘रंग मस्ताने‘ के 18 कलाकारों ने बखूबी प्रस्तुत किया। नाट्यवृंद व अपना थियेटर संस्थाओं का विषेष सहयोग रहा। नाटक में संगीत राजू कुमार, प्रकाष शहजीर अली, वस्त्र विन्यास बबीता मदान का रहा तथा बैक स्टेज सहयोगी आयुषि आनंद व अभिषेक मुद्गल थे।
इनके अभिनय ने किया प्रभावित -ः नवीनकाली के रूप् में संगीता गैरा, कमला के पात्र में आयुषी दीक्षित, हेम के अभिनय में प्रिया मिश्रा, अक्षय के रूप् में विवके माथुर व रमेष के पात्र में अंषुल अवस्थी के भावनात्मक सहज अभिनय ने खासा प्रभावित किया। इनके अलावा नाटक में योगेष नरूला, विवके माथुर, अषोक मीणा, शोभित अग्रवाल, विकास पारीक, बबीता मदान, मिताली तनवानी, महेष झीलोवा व मान मदान ने भी विविध भूमिकाओं को अदा किया।