अजमेर। अंतरास्ट्रीय कार्तिक मेले मे जहा एक और पशु मेले कि र©नक बढने लगी है वही धार्मिक मेले कि आहट सुनाई देने लगी है। वही इन सबसे अनजान पशु-पालन विभाग अभी भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है । हालांकि जिला कलेक्टर वैभव गालरिया ने पुष्कर का द©रा कर सभी विभाग¨ क¨ लताड लगाते हुए समय पर सभी व्यवस्थाओ क¨ पूरा करने के र्निदेश दिए है। लेकिन बावजूद इसके मेला क्षेत्र में व्यवस्थाये ठहर सी गई है । मेला क्षेत्र मिनी गाँव में तब्दील ह¨ चूका है , और हजार¨ कि तादात में पशु पहुँच चुके है लेकिन उनक¨ फिलहाल मूलभूत सुविद्याओ के लिए इन्तजार करना पडेगा । देश के अनेक हिस्स¨ से आये पशु पालक¨ के पास सर्द रात¨ं में खुले आसमान के निचे रात बिताने के सिवाय और क¨ई चारा नहीं है त¨ उन्ह¨ंने भी परिस्थितिय¨ से समझ¨ता कर लिया है । पशु पालक रेतीले ध¨र¨ में पारम्परिक तरीके से अपना खाना बनाकर खुश रहने कि क¨शिश कर रहे है । मेला क्षेत्र में पशुओ के लिए बनाई गई पानी कि खेलिया अभी भी खाली पडी है और चारा भी महँगी कीमत पर बिक रहा है । इन सब परेशानीयों के बावजुद पशुपालक मेले को परवान चढाने में लगे हुए है। प्रशासन द्वारा आयोजित ऊँट नृत्य प्रतियोगिता और श्रृंगार प्रतियोगिता में भाग लेेने के लिए पशुपालकों ने अपने पशुओं को अभ्यास कराना शुरू कर दिया है।
मेले में अस्थाई दुकाने लगाने वाले व्यापारी भी अव्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन को आडे हाथों ले रहे है। व्यापारीयों का आरोप है कि पालिका के कर्मचारी उनसे व्यवस्थाओं के नाम पर बार-बार वसुली करने तो आ जाते है। लेकिन व्यवस्थाऐं सुधरनें का नाम नहीं ले रहीं है। हैरानी की बात तो यह है कि अभी तक पशुपालन विभाग ने ना तो अपना कन्ट्रोल रूम स्थापित किया है और न ही मेला क्षेत्र में ऐसा कोई अधिकारी है जिसकी जवाबदेयी हो।