दो बूंद विष।
मृत्यु से डरता नही है वह न ही डरता है किसी और से, पर छोड़ जाना चाहता है संसार को बूढ़ा हो जाने के डर से। देखा है उसने बूढ़े मां-बाप को बहू-बेटों के हाथों पिटते हुए, भय से थर-थर कांपते हुए मूक बन ज़िन्दा लाश बनते हुए, घर से बेदखल होते हुए गली-चौरहों पर … Read more