सुकून संन्यास में भी नहीं है?
कुछ विद्वानों को आपने यह कहते सुना होगा कि वानप्रस्थ व संन्यास आश्रम में जितनी तपस्या है, उससे कहीं अधिक तपस्या गृहस्थ में है। असल तपस्या गृहस्थ में ही है। वह इसलिए कि संसार में बहुत संघर्श है, समस्याएं हैं, अहम का टकराव है, वर्चस्व की होडा होडी है। तलवार की धार पर चलने के … Read more