वित्तीय क्षेत्र में कानूनी सुधारों पर न्यायमूर्ति बी श्रीकृष्णा की अध्यक्षता में बने आयोग (एफएसएलआरसी) की रिपोर्ट सार्वजनिक हो चुकी है। यह रिपोर्ट वित्तीय नियमन के साथ-साथ निवेश और बचत की पूरी दुनिया को ही बदल कर रख देगी।
अभी निवेश की दुनिया 1870 से चले आ रहे 60 से भी ज्यादा छोटे, बड़े अधिनियमों के आधार पर अपनी दिशा तय करती है। आयोग ने इन सभी अधिनियमों को एक नए कोड में समाहित कर वित्तीय लेन देन और निवेश संबंधी नियमों को एक ही जगह समेटने की कोशिश की है। इस कोड में 475 धाराएं हैं, जबकि अकेले डीटीसी यानी डायरेक्ट टैक्स कोड में ही 319 धाराएं और 22 शेड्यूल्स हैं। इस कोड को 9 मानकों के आधार पर तैयार किया गया है, जिसमें निवेशकों व ग्राहकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रेगुलेशन को किसी भी बाजार की दिशा तय नहीं करनी चाहिए, बल्कि बाजार में बदलावों के साथ अपनी दिशा को तय करना चाहिए।
आयोग का मानना है कि वित्त की दुनिया से जुड़ी ग्राहकों की सारी परेशानियों को एक ही एजेंसी संभाले। रिपोर्ट में इसे वित्तीय शिकायत समाधान एजेंसी (फाइनेंशियल रीड्रेसल एजेंसी यानी एफआरए) कहा गया है। इस समिति के पास निवेशकों की किसी भी तरह की परेशानियों को कम से कम लागत में सुलझाने का अधिकार होगा। अभी रेगुलेटर सर्कुलर, नोटिफिकेशन, प्रेस रिलीज नोटिस, आदेश, दिशानिर्देश आदि जारी करते हैं जो काफी कंफ्यूजन पैदा करते हैं। आयोग ने इस व्यवस्था में सुधार की वकालत की है।
समिति ने इस ओर भी सरकार का ध्यान दिलाने की कोशिश की है कि पोंजी स्कीम्स को लेकर अभी तय ही नहीं है कि इनका नियमन कौन करेगा और बेचारा निवेशक इसमें मारा जाता है। रीयल एस्टेट को लेकर अभी कोई नियामक नहीं बन पाया है। एफआरए मौजूदा बैंकिग लोकपाल और बीमा लोकपाल की व्यवस्था को अपने में समाहित कर लेगा और ग्राहक अपनी परेशानियों को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत पहले की ही तरह कंज्यूमर फोरम का लाभ उठाते रहेंगे। आयोग ने एसबीआइ और जीवन बीमा निगम को कंपनी कानून के तहत कंपनी बनाने की सिफारिश की है।
सिफारिशें जो निवेश पर डालेंगी असर:
-एकीकृत वित्तीय नियमन एजेंसी और आरबीआइ दो बड़े नियामक हों।
-एकीकृत वित्तीय नियमन एजेंसी बीमा, शेयर, पेंशन, कमोडिटी सभी बाजारों का नियमन करे।
-ग्राहकों की सभी परेशानियों से निपटने के लिए एकीकृत शिकायत समाधान एजेंसी (एफआरए) हो।
-बाजार में गड़बड़ी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई।
-वित्तीय क्षेत्र के लिए एकीकृत अपीलीय ट्रिब्यूनल बने जो आरबीआइ और दूसरे नियामक के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई करे।
-निवेशकों की सुरक्षा के लिए सलाहकार समिति बनाने की सिफारिश।
-निवेशकों की समस्या सर्वप्रथम मध्यस्थता के जरिये सुलझाई जाए।
निवेशकों के मिलें ये अधिकार:
-वित्तीय सेवा प्रदाता पूर्ण रूप से प्रोफेशनल तौर पर सेवाएं दे
-कॉन्ट्रैक्ट की कमियों के विरुद्ध निवेशकों को सुरक्षा मिले।
-सेवा प्रदाता की गलत नीतियों के विरुद्ध निवेशकों को सुरक्षा मिले।
-निवेशकों की व्यक्तिगत सूचनाओं की सुरक्षा।
-सभी जोखिमों की जानकारी निवेशकों को दी जाए।
-निवेशक किसी भी परेशानी के लिए नियामक के पास जा सके।
-छोटे निवेशकों को उचित सलाह का हक।
-सलाहकारों के परस्पर विरोधी हितों के विरुद्ध सुरक्षा का हक।