ओम्, ओंकार, प्रणव और प्राण
ये चार अस्तित्व हैं, शब्द नहीं। ये हमारे जीवन से जुड़े हुए हैं। जीव का आधार हैं। जीव को पदार्थ से उठा कर परमार्थ तक ले जाने के माध्यम हैं। ओम् तो अनादि काल से ऊर्जा का अनादि स्रोत है। ऊर्जा निकलते रहने से जो आवाज होती है उसे हम ओम् का नाद कहते हैं। … Read more