विकलांगों का मसीहा राणी जी जोशी
आजे के युग में भाई-भाई का न रहा। पैसे के पीछे मानव ऐसे दौड़ रहा है, जैसे पैसा ही सब कुछ हैं। पैसे के लिए लोग रिश्ते तक ताक पर रखकर बेईमानी तक करना नहीं भूलते। छल-कपट, चोरी-डकैती व येन-केन प्रकार से पैसे कमाना ही उनका मकसद रह गया है। ऐसे में भला गरीब, लाचार … Read more