यातायात की सुगमता के लिए दो नए वैकल्पिक मार्ग जरूरी

इन दिनों अजमेर को स्मार्ट सिटी बनाए जाने का कार्य किया जा रहा है। इसमें अन्य विकास कार्यों के अतिरिक्त वर्षों पुरानी ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए एलिवेटेड रोड पर काम शुरू हो गया है। हालांकि इसमें थोड़ा समय लगेगा, मगर जब यह पूरा हो जाएगा, तो इसके फायदे से हर व्यक्ति रूबरू होगा। इसी के साथ स्मार्ट सिटी योजना में अगर दो वैकल्पिक मार्गों को भी बनाया जाए तो शहर में यातायात का दबाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।
एक वैकल्पिक मार्ग नाका मदार से जयपुर रोड तक वाया रसूलपुरा हो सकता है। इसकी कल्पना कई साल पहले तत्कालीन यूआईटी चेयरमैन औंकारसिंह के कार्यकाल में की गई थी। इसके लिए बाकायदा सर्वे का प्रस्ताव भी पारित किया गया, मगर बाद में इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। न तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इसमें रुचि दिखाई और न ही अफसरशाही ने इसकी सुध ली। वे तो झगडऩे में व्यस्त रहे। सच तो ये है कि जनप्रतिनिधियों की लापरवाही और आपसी खींचतान के चलते एलिवेटेड रोड तक खटाई में पड़ा हुआ था। तत्कालीन यूआईटी चेयरमैन नरेन शहाणी भगत के कार्यकाल में सर्वे भी हुआ, मगर बाद में उसे लंबे अरसे तक ठंडे बस्ते में डाल कर रख दिया गया। कभी उसकी उपयोगिता के नाम पर विवाद हुआ तो कभी निर्माण के लिए उपयुक्त बजट न होने का रोना रोया गया। कभी उसे अव्यावहारिक बताया गया तो कभी व्यापारियों की नाराजगी का बहाना बनाया गया। पिछली सरकार में शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी व अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिवशंकर हेडा इस मुद्दे पर लगातार टकराते रहे। अगर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में इसे शामिल नहीं किया जाता तो यह एक कल्पना मात्र रह जाता।
बहरहाल, बात वैकल्पिक मार्ग की। यदि राजनीतिक मतभेद भुला कर केवल जन हित का ही ख्याल रखा जाए तो अजमेर का कुछ भला हो सकता है। नाका मदार, जेपी कॉलोनी, टैम्पो स्टैंड से जयपुर रोड वाया रसूलपुरा तक वैकल्पिक मार्ग बनादिया जाए तो जयपुर रोड, यूनिवर्सिटी, जनाना हॉस्पिटल, लोहागल तक की जनता को मदार रेलवे स्टेशन पर आने-जाने में सुविधा मिलेगी। इससे जनता को नगर के अन्दर से नहीं आना पड़ेगा और नगर में ट्रेफिक के भार में भी कमी आएगी।
इसी प्रकार शास्त्री नगर से वैशाली नगर तक भी एक वैकल्पिक मार्ग बनाया जा सकता है। इसके निर्माण से मुख्य आनासागर सक्र्यूलर रोड पर ट्रेफिक में भारी कमी होगी। आपको बता दें कि इसका प्रारूप जाने-माने इंजीनियर कमलेन्द्र झा ने बनाया था, जो कि काफी हद तक कारगर हो सकता है।

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