क्या भाजपाई किसी बाहरी दावेदार को बर्दाश्त करेंगे?

ऐसी खुसर-फुसर है कि आगामी लोकसभा चुनाव में अजमेर सीट पर इसे चरागाह समझने वालों की भी नजर है। अब तक तो स्थानीय दावेदारों के नाम ही उभर कर आए थे, मगर एक बाहरी दावेदार की भी चर्चा हो रही है। वो हैं पूर्व केबीनेट मंत्री डॉ. नाथूसिंह गुर्जर। अजमेर संसदीय क्षेत्र में तकरीबन सवा लाख गुर्जर मतदाता हैं। यहां से एक बार मौजूदा उप मुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। कदाचित यही सोच कर गुर्जर को यहां लॉंच किए जाने की चर्चा है।
पहले आपको बता दें कि यहां स्थानीय दावेदार कौन-कौन से हैं। वे हैं भाजपा देहात जिलाध्यक्ष प्रो बी पी सारस्वत, भाजपा नेता भंवरसिंह पलाड़ा, पूर्व जिला प्रमुख पुखराज पहाडिय़ा, पूर्व विधायक भागीरथ चौधरी, पूर्व यूआईटी चेयरमैन धर्मेश जैन, युवा नेता डॉ. मिथलेश गौतम व जिला मंत्री सत्यनारायण चौधरी। इन सबमें सबसे प्रबल दावेदारी सारस्वत की मानी जा रही है। चूंकि लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस के डॉ. रघु शर्मा यहां से जीत चुके हैं, इस कारण ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा इस बार ब्राह्मण कार्ड खेल सकती है।
आइये, अब जरा पीछे चलते हैं। जिस चुनाव में यहां सचिन पायलट आए थे, उस समय कांग्रेस के पास कोई तगड़ा स्थानीय दावेदार था नहीं। हालांकि परिसीमन के बाद यह सीट जाट बहुल हो चुकी थी, मगर जब कांग्रेस ने पायलट को मैदान में उतारा तो सैलिब्रिटी के सामने सैलिब्रिटी को भिड़ाने के लिए भाजपा ने श्रीमती किरण माहेश्वरी को आयातित किया। तब दावा स्वर्गीय प्रो. सांवरलाल जाट का दावा था, मगर उन्हें पायलट के सामने कमजोर माना गया। खैर पायलट जीत गए। बाद के चुनाव में कांग्रेस की ओर से तो पायलट ही आए, मगर भाजपा ने जाट को मौका दिया। हालांकि पायलट ने भरपूर काम करवाए, मगर मोदी लहर के चलते जाट जीत गए। उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने सहानुभूति के नाम पर उनके पुत्र रामस्वरूप लांबा पर दाव खेला, लेकिन वे कांग्रेस के डॉ. रघु शर्मा के सामने टिक नहीं पाए। लांबा अब नसीराबाद से विधायक हैं। ताजा स्थिति ये है कि भाजपा के पास तगड़ा जाट दावेदार है नहीं। गिने-चुने दो नाम हैं पूर्व विधायक भागीरथ चौधरी व पूर्व जिला प्रमुख श्रीमती सरिता गैना। विशेष परिस्थिति में नागौर से सी आर चौधरी को इंपोर्ट किया जा सकता है। गैर जाट में सारस्वत ही सबसे प्रबल दावेदार हैं।
अब सवाल ये उठता है कि क्या स्थानीय दावेदार चौधरी अथवा गुर्जर को बर्दाश्त कर पाएंगे। चौधरी तो फिर भी पचा लिए जा सकते हैं, क्योंकि अजमेर उनका कार्यक्षेत्र रहा है और यह सीट जाट बहुल है, लेकिन मात्र सवा लाख वोटों के आधार पर गुर्जर को यदि लाया गया तो संभव है, पार्टी में विरोध के स्वर उभर कर आएं। बेशक गुर्जर एक सैलिब्रिटी हैं, क्योंकि एक तो वे दो बार सांसद और चार बार विधायक रहे हैं, इसके अतिरिक्त क्रिकेट खिलाड़ी व फिल्म अभिनेता भी हैं। उन्होंने गुर्जरों के आराध्य देवता देवनारायण पर बनाई गई राजस्थानी फिल्म देव में बतौर अभिनेता के रूप में देवनारायण की भूमिका निभाई है। खैर, देखते हैं कि आगे आगे होता है क्या? हो सकता है कि कुछ और नए नाम भी उभर कर आएं।

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