रेड जोन अजमेर में इतनी लापरवाही

ओम माथुर
अजमेर में कोरोना के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन फिर भी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग शायद इसके प्रति गंभीर नहीं है ।
बुधवार की सुबह 8:30 बजे होलीदडा निवासी जिस बुजुर्ग की मृत्यु हुई थी और उसके बाद उनकी कोरोना जांच पाजिटिव आई थी, उनके परिवार को करीब 30 घंटे बाद गुरुवार दोपहर दो बजे जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया। जबकि कोरोना संक्रमित रिपोर्ट आने के साथ ही विभाग को तुरंत बुजुर्ग की पत्नी एवं दोनों बच्चों को आइसोलेशन में भेजना चाहिए था। लेकिन वे 30 घंटे तक घर में ही रहे। ऐसी गलती चिकित्सा विभाग एवं प्रशासन ने मुस्लिम मोची मौहल्ला में पहले पॉजिटिव मिले युवक के समय में भी की थी। जब वहां करीब 350 लोगों के सैंपल तो ले लिए गए थे। लेकिन उन्हें उसी रात आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट नहीं कर अगले दिन ले जाया गया। नतीजा यह रहा कि मुस्लिम मोची मोहल्ला अब कोरोना का हॉटस्पॉट बन चुका है।
बुजुर्ग के परिजनों ने खुद को अस्पताल ले जाने के लिए जब अधिकारियों से संपर्क किया, तो उन्हें यह बताया गया कि पहले मृतक का अंतिम संस्कार होगा उसके बाद उन्हें ले जाया जाएगा । जबकि अंतिम संस्कार नगर निगम को करना था और अस्पताल ले जाने की जिम्मेदारी चिकित्सा विभाग की थी। बुजुर्ग के एक रिश्तेदार ने इस संबंध में फेसबुक पर 20 घंटे बाद एक पोस्ट भी डाली थी। जो संलग्न है। यह लापरवाही तो उस अजमेर में है,जो रेड जोन में शामिल है और दावा किया जा रहा है कि विभाग अब तक 22 लाख से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग कर चुका है
लेकिन सर्वे और स्क्रीनिंग की सच्चाई तो और भी डराने वाली है। जो एएनएम, जीएनएम या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सर्वे करने के लिए जा रही हैं।उनके पास थर्मामीटर तक नहीं है,टेम्परेचर गन की तो बात छोडिए। वह सिर्फ घर के बाहर जाकर किसी एक परिजन से ही पूछ लेती है कि उनके घर में कौन-कौन हैं । किसी को बुखार जुकाम तो नहीं है । जबकि होना यह चाहिए कि हर व्यक्ति की कम से कम तापमान की जांच तो की ही जाए। लेकिन सर्वे के नाम पर सिर्फ आंकड़ेबाजी पूरी की जा रही है। रेंडम सेंपलिंग की बात तो छोड़िए, इन इलाकों में कोरोना के मरीज आए हैं उन इलाकों में भी अभी तक सभी लोगों की सैंपलिंग नहीं की गई है आपको जानकर ताज्जुब होगा कि अभी तक अजमेर में केवल साढे चार हजार लोगों के सैम्पल लेकर जांच कराई गई है। 6 लाख की आबादी में इसे ऊंट के मुंह में जीरा भी नहीं कह सकते। ऐसे में कोरौना पर काबू कैसे पाया जा सकेगा।
उधर क्वॉरेंटाइन सेंटरों की जो तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर आ रहे हैं ,उसे देखकर भी लोगों में यह डर बैठ गया है कि अगर उन्होंने आगे होकर जांच कराई और क्वारेंटाइन सेंटर भेज दिया,तो मुसीबत में कैसे रहेंगे। इसीलिए मशहूर कार्डियक सर्जन और नारायण हेल्थ के चेयरमैन डॉ देवी शेट्टी ने कहा भी है कि इन सेंटर्स में अच्छा खाना और व्यवस्थाएं नहीं हुई तो लोग उन्हें छोड़ने लगेंगे और अगर इनमें से एक भी कोई संक्रमित हुआ, तो स्थिति खतरनाक हो सकती है। जून में देश में कोरोना के रिकॉर्ड मरीज होने की खबरों के बीच इस तरह की लापरवाही क्या घातक साबित नहीं होगी?

ओम माथुर/9351415379

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