सात दशक पूर्व अजमेर में गांधी जयंती समारोह का आंखों देखा हाल

b l samra
वर्ष 1952 में गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह का साप्ताहिक आजाद के अंक में प्रकाशित गांधी जयंती समारोह का आंखों देखा हाल प्रकाशित हुआ है । वह इस प्रकार है 2 अक्टूबर को नगर में गांधी जयंती महोत्सव सभी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा बड़ी धूमधाम से मनाया गया । प्रातः काल 8:00 बजे करके सभी सरकारी भवनों पर विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा झंडा फहराया गया और कार्यालय में महात्मा गांधी के चित्र का अनावरण कर माल्यार्पण किया गया । अजमेर मेरवाड़ा राज्य के विधान सभा के मीर शाली स्थित भवन में विधानसभा अध्यक्ष भागीरथ सिंह चौधरी द्वारा महात्मा गांधी के चित्र का अनावरण कर माल्यार्पण किया गया । प्रातः 8:00 बजे स्थानीय नगरपालिका की ओर से गांधी भवन में चरखा यज्ञ हरिजन बालकों की साफ सफाई के साथ स्वच्छता अभियान प्रारंभ किया गया । इसका उद्घाटन राजस्व मंत्री बृजमोहन लाल शर्मा ने किया । स्थानीय सरस्वती बालिका विद्यालय के छात्र संघ की ओर से शाम को एक भव्य जुलूस निकाला गया जो नगर के प्रमुख बाजारों में घूमता हुआ गांधी विद्यालय के वहां जाकर सभा के रूप में परिवर्तित हो गया । शाम को चटाई मोहल्ला केसरगंज में युवक संघ की ओर ओर से एक सभा का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता जनसंपर्क विभाग के संचालक चंद्रगुप्त वार्ष्णेय ने की । श्रीमती प्रभा मिश्रा के भाषण के साथ कई लोगों ने कविता पाठ किया और श्री वार्ष्णेय ने अध्यक्ष पद से भाषण देते हुए महात्मा गांधी के सिद्धांतों का सूक्ष्म किंतु अत्यंत सादगी के साथ विवेचन किया गया । रात्रि में 8:30 बजे गांधी भवन में प्रगतिशील नव युवक कांग्रेस की ओर से अध्यक्ष प्रेम नारायण मेहरा के आयोजन में जयंती समारोह हुआ ,जिसका उद्घाटन राज्य के मुख्यमंत्री हरीभाऊ उपाध्याय ने किया ।
आजाद सप्ताहिक 2 अक्टूबर 1952 का अंक विरासत सेवा संस्थान के अध्यक्ष बी एल सामरा के संग्रह में सुरक्षित है । उनके पास बापू के समाचार पत्र हिंदी नवजीवन के 52 अंक भी सुरक्षित हैं । इसके अलावा उनके पास बापू के विभिन्न राजनेताओं के साथ डेढ़ सौ कैमरा फोटोग्राफ भी सुरक्षित है और उनके संग्रह में बापू के बचपन से लेकर स्वाधीनता संग्राम , दांडी यात्रा , सत्याग्रह आंदोलन,गोलमेज सम्मेलन,कांग्रेस अधिवेशन और उनकी किशोरावस्था से बैरिस्टर बनने तक पंडित जवाहरलाल नेहरू ,डॉ राजेंद्र प्रसाद राधाकृष्णन नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित अनेक को राजनेताओं के साथ चित्र भी मौजूद हैं और 30 जनवरी 1948 की शाम उनकी हत्या होने के बाद प्रार्थना सभा में पारित शोक प्रस्ताव की मूल प्रति एवं अंतिम यात्रा के चित्र भी मौजूद हैं । हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं और अनुकरणीय है ।

आलेख प्रस्तुति
*बी एल सामरा नीलम*
संस्थापक अध्यक्ष
और प्रमुख मैनेजिंग ट्रस्टी *विरासत सेवा संस्थान अजमेर*

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