पशु मेला आयोजन पर असमंजस की स्थिति!

अरुण पाराशर
💐 अंतरराष्ट्रीय पुष्कर धार्मिक और पशु मेला आयोजन पर लगातार दूसरे वर्ष भी जिला कलक्टर द्वारा 22 सितम्बर को पुष्कर पशु मेला आयोजन को निरस्त किए जाने के आदेश के बाद,मेला आयोजन को लेकर असमंजस की स्थिति!
💐पशु मेले को अनुमति तो धार्मिक मेले को क्यों नहीं?
💐अन्य धर्मों के धार्मिक मेलों में करोड़ों के सरकारी बजट और सरकारी स्तर पर आयोजन की व्यवस्था की जाती है तो पुष्कर के धार्मिक मेले के लिए करोड़ों का बजट और व्यवस्था सरकारी स्तर पर धार्मिक मेला आयोजन कमेटी बनाकर क्यों नही की जाती है, ऐसा भेदभाव क्यों?
💐आज अन्य समाचार पत्रों को छोड़ कर केवल एक दैनिक समाचार पत्र, राजस्थान पत्रिका में पुष्कर मेला आयोजन को लेकर प्रकाशित खबर “धन्यवाद पत्रिका”: पशु मेला आयोजन की मिली अनुमति के दमदार बड़े हैडिंग से छपी खबर को पढ़ने के बाद जानकारी मिली कि पुष्कर पशु मेला आयोजन का रास्ता खुलने पर पशु पालकों के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों, पुरोहितों, जन प्रतिनिधियों ,संतों, सिख समुदाय आदि ने भी खुशी व्यक्त की है। खबर में बताया गया कि 5 से 21 नवंबर तक गाइड लाइन के साथ होगा पशु मेले का आयोजन। लेकिन धार्मिक मेले की अनुमति ?
💐इस खबर में केवल पशु मेला आयोजन की अनुमति दिए जाने की बात कही गई है कि राज्य सरकार की ओर से जारी गाइड लाइन के अनुसार मास्क, सेनेटाइजर, दो गज की दूरी एवं बंद स्थानों पर उचित वेंटिलेशन का ध्यान रखते हुए पशुहाट मेले का आयोजन किया जा सकेगा।पशु मेला भी गाइड लाइन के अनुसार ही आयोजित किया जाएगा। लेकिन पूरी खबर में पौराणिक पुरातन धार्मिक कार्तिक पंच तीर्थ स्नान मेले के आयोजन की अनुमति दिए जाने की कहीं कोई बात नहीं बताई गई है और तो और इस पूरी खबर में राज्य सरकार के दिशा निर्देशानुसार न तो जिला प्रशासन न ही पशु पालन विभाग की ओर से आधिकारिक रूप से पुष्कर पशु एवम धार्मिक मेले के आयोजन की विधिवत घोषणा के लिखित आदेश या जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई वर्जन भी नहीं दिया गया है। हां आभार वर्जन के रूप में हमारे सम्माननीय जन प्रतिनिधियों, विधायक श्री सुरेश रावत, पालिका अध्यक्ष श्री कमल पाठक प्रतिपक्ष नेता श्री ओम प्रकाश डोल्याआदि ने पत्रिका परिवार को धन्यवाद देकर सरकार को झुका देने की बात जरूर कही है कि जनता की मांग के आगे आखिरकार सरकार को मेला आयोजन पर लगाई पाबंदी हटानी पड़ी।ओरअब यह तो इन पर भरोसा मानकर चलना चाहिए कि हमारे यह जन प्रतिनिधि पशु मेला तो इस बारआयोजित करवाके ही दम लेंगे लेकिनइन्हें धार्मिक मेले की अनुमति नहीं मिली इसका कोई दुख और मलाल होता नहीं दिखा। इससे स्पष्ट जाहिर हो रहा है कि पुष्कर पशु मेला आयोजन अनुमति की पूरी खबर पर हमारे चुने हुए जागरूक , कर्मठ जन प्रतिनिधियों द्वारा खुशी जाहिर करना मात्र सरकार द्वारा कल यानी 11/10/2021 को जारी हुई नई गाइड लाइन में प्रदान की गई मामूली रियायतों पर आधारित है न कि राज्य ,जिला प्रशासन द्वारा अधिकृत बयान, आदेश पर आधारित है। इसलिए केवल एक अखबार में प्रकाशित पुष्कर पशु मेला आयोजन की मिली अनुमति की बात को अभी भी स्पष्ट और आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं माना जा सकता है।क्यों कि आम जन के जुड़े सामाजिक, धार्मिक , राजनैतिक संगठनों द्वारा मेला आयोजन की अनुमति दिए जाने के संबंध में गत दिनों जिला कलक्टर महोदय के माध्यम से माननीय श्री अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री जी से मांग की गई थी जिस पर राज्य सरकार ने पशु पालन विभाग के माध्यम से इस पर अंतिम निर्णय लेने के लिए जिला कलक्टर अजमेर व संभागीय आयुक्त महोदया को अधिकृत किया था। लेकिन अभी तक इन दोनों अधिकारियों ने आज दिन तक मेला अनुमति दिए जाने का कोई निर्णय नही लिया है इसलिए अभी भी पुष्कर धार्मिक और पशु मेला आयोजन की अनुमति को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
💐राजस्थान पत्रिका अखबार में आज छपी पुष्कर पशु मेला आयोजन की मिली अनुमति की खबर के बाद मेला आयोजन की आधिकारिक घोषणा के अभाव में पुष्कर के लोगों में हो रही भ्रामक और असमंजस की स्थिति को लेकर हमारे द्वारा सरकारी स्तर पर वास्तविकता की जानकारी हासिल की गई।
💐इस संबंध में हमने सबसे पहले पुष्कर पशु मेला आयोजन कर्ता विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ श्री प्रफुल्ल माथुर जी से अखबार में प्रकाशित खबर पशु मेला अनुमति हो जाने की जानकारी चाही ,जिस पर उन्होंने स्पष्ट बताया कि उनके पास ऐसी कोई अनुमति अभी तक नहीं मिली है यही बताया कि इस संबंध में अंतिम निर्णय जिला कलक्टर और संभागीय आयुक्त साहब को ही लेना है वहां से किसी भी प्रकार का कोई अनुमति निर्देश हमे अभी तक तो नही मिला है। इसके बाद हमने जिला कलक्टर महोदय के निजी सचिव से जानकारी चाही तो उन्होंने भी अभी मामला प्रक्रियाधीन होना बताया, फिर हमने संभागीय आयुक्त महोदया के निजी सचिव से जानकारी चाही तो उन्होंने भी केवल यह बताया कि आयुक्त महोदया ने इस संबंध में कल कलक्टर महोदय से मौखिक चर्चा ही की है, फिर हमने अतिरिक्त कलक्टर महोदय श्री कैलाश चंद्र शर्मा जी से भी जानकारी चाही तो उन्होंने भी मेला अनुमति से जुड़े कोई अधिकृत आदेश हुए होने से अनभिज्ञता जाहिर करते हुए बताया कि अखबार में छपी खबर राज्य सरकार की गाइड लाइन के आधार पर छापी गई लगती है।जिला प्रशासन के स्तर पर अभी तक ऐसा कोई आदेश नहीं किया गया है।
💐इन सारी जानकारी पड़ताल के बाद यह तो स्पष्ट है कि आज दिन तक पुष्कर पशु एवम धार्मिक मेला आयोजन की अनुमति राज्य सरकार या जिला प्रशासन द्वारा अधिकृत रूप से प्रदान नही की गई है। हां पत्रिका में छपी खबर,यह कि पुष्कर पशु मेला आयोजन की मिली अनुमति ! इस पर पशु पालकों को खुशी मनाना चाहिए लेकिन धार्मिक मेले की अनुमति की बात ही नहीं की गई है तो धार्मिक ,सामाजिक, संगठनों, पुरोहितों, संतो, सिख समुदाय आदि ने खुशी व्यक्त की से उनको क्या फायदा और क्या लेना देना! जब केवल पशु मेले की अनुमति ही मिली हो और धार्मिक कार्तिक पंच तीर्थ महा स्नान मेले को कहीं कोई अनुमति दी ही नहीं गई हो। फिर भी हमारे चुने हुए जन प्रतिनिधि धार्मिक मेले की उपेक्षा पर चुप और पशु मेले की अखबारी अनुमति पर उछल कूद कर खुशियां मना रहे है।
💐पुष्कर तीर्थ के पुरोहित और हिंदू धार्मिक श्रद्धालुओं की आस्था भावना जाए भाड़ में, क्यों कि केवल पशु पालक ही तो हमें वोट देते हैं चुनाव में।
💐 पुष्कर तीर्थ और जनता पूछती है? हमारे जन प्रतिनिधियों से।
💐 आदि अनादि पवित्र पुष्कर तीर्थ की प्रबुद्ध जनता पूछ रही है कि तीर्थों में श्रेष्ठ तीर्थ की प्रतिष्ठा,प्रसिद्धि, शास्त्र, पुराणोक्त महात्म्य में निहित वैकुंठ धरा और जगत पिता श्री ब्रह्मा जी की तपोभूमि जो कि देवताओं को भी दुर्लभ है की स्थापित गौरव मयी परंपरा से जुड़े प्रतिवर्ष आयोजित कार्तिक पंच महा स्नान के धार्मिक मेले का आयोजन क्या सरकार अन्य धार्मिक मेलों की तरह क्यों नही करवाती, जैसे सूफी संत मोइनुद्दीन चिस्ती की दरगाह में सालाना आयोजित उर्स, मोहर्रम मेले को सरकारी आयोजन मान कर सारी व्यवथाएँ करोड़ों के सरकारी बजट और कोष से करवाती है, देश और राज्य में चारों कुंभ मेले सहित सैकड़ों धार्मिक मेले सरकारी स्तर पर आयोजित होते है, लेकिन पुष्कर धार्मिक मेला न कोई सरकारी बजट और न ही कोई सरकारी मेला आयोजन कमेटी, जिसमे सामाजिक धार्मिक संगठन के प्रतिनिधि हो, केवल पशु मेले की आड़ में होना मानकर भीड़ नियंत्रण के लिए कानून और सुरक्षा इंतजाम तक सीमित होता है ,जब कि सतयुग से पुरातन परंपरा तो यह चली आ रही है कि धार्मिक कार्तिक स्नान मेले के बहाने से ही पशु पालक अपने पशुओं को यहां लाकर खरीद बेचने का कार्य भी साथ साथ कर लेते थे, इस कारण कुछ सौ वर्षो से पशु मेले को एक नई अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली है। ओर यह मेला विदेशियों के आकर्षण का केंद्र बना है। आज हमारी सरकारें और जन प्रतिनिधि हमारे हिंदू धर्म आस्था और पूजा स्थलों की उपेक्षा और अनदेखी कर ,पशु मेले के नाम पर मेले के बदले स्वरूप विदेशी पर्यटकों और पश्चिम संस्कृति के साथ मौज मस्ती से(शराब, शबाब, कबाब नाच गान से सराबोर) ओतप्रोत मेले सरकारी धन से आयोजित करवाने को प्राथमिकता देते है ,क्यों नही पुष्कर धार्मिक मेला भी अन्य धार्मिक मेलों की तरह आम श्रद्धालुओं की सुख सुविधा के लिए करोड़ों के सरकारी बजट और सरकारी आयोजना कमेटी बनाकर भव्यता से आयोजित करवाया जाएं। इस संबंध में हमारे जन प्रतिनिधि आज तक नकारा साबित होकर, मौन और सोएं क्यों है?
💐पुष्कर तीर्थ और जनता उनसे पूछती है।यह उपेक्षा कब तक सहेंगे। यह आज हिंदुओं के नाम से सत्ताभोगियो से सवाल है।
💐पुष्कर पशु मेला आयोजन की अनुमति दी जाती है तो पुष्कर तीर्थ की पुरातन परंपरा से जुड़े धार्मिक मेले आयोजन की भी अनुमति और सरकारी बजट से और धर्मो के मेलों की तरह सरकारी स्तर पर पुष्कर धार्मिक मेला व्यवस्था आयोजन कमेटी बनाकर की जानी चाहिए। सरकार से पुष्कर की जनता और तीर्थ भी, बिना भेदभाव के मेला आयोजन की मांग करता है। अब मिथक बदला जाना चाहिए। या राज्य सरकार अन्य धर्म के धार्मिक मेलों में सरकारी बजट और सरकारी स्तर पर आयोजना को भी समाप्त करे।

निवेदक: अरुण पाराशर, तीर्थ पुरोहित एवम सामाजिक कार्यकर्ता पुष्कर तीर्थ ।

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