दरगाह नाजिम अष्फाक हुसैन बहुत कुछ करना चाहते थे

अमूमन भले आदमी के साथ कुछ ज्यादा ही नाइंसाफी होती है। कायनात का यह कैसा निजाम है, आज तक समझ में नहीं आया। देवता भी आमतौर पर राक्षसों से परेषान होता है, जबकि देवता राक्षस को कोई तकलीफ नहीं देता। इस अनुभव के साथ मैं आपसे साझा करने जा रहा हूं हाल ही हुए एक वाकये का।
सब जानते हैं कि अजमेर में दरगाह ख्वाजा साहब का प्रबंध संभालने वाली दरगाह कमेटी में नाजिम के तौर पर काम कर रहे जनाब अष्फाक हुसैन ने एक कथित विवाद के चलते इस्तीफा दे दिया।
हालांकि वे इस विवाद से पहले भी बेहतर तरीके से काम न कर पाने के कारण इस्तीफा दे चुके थे,
जो कि नामंजूर कर दिया गया। मगर वह विवादित खबर के हो हल्ले के बीच दफ्न हो गया।
खैर, जो कुछ हुआ वह सब को पता है, मगर मैं वह पहलु आपको दिखाना चाहता हूं, जो ठीक से उजागर नहीं हो पाया।
आपको बता दूं कि जब वे आईएएस के रूप में सरकारी नौकरी से निवृत्त होने के बाद एक बार फिर दरगाह नाजिम नियुक्त हुए तो मेरी एक खास मुलाकात हुई। मैंने उनसे पूछा था कि पिछला कार्यकाल तो सबको पता है, इस बार क्या कुछ नया करना चाहेंगे।
उन्होंने बताया कि पिछली बार सरकारी नौकरी में रहते हुए पद संभाला था। इस बार केवल एक ही ख्वाहिष है कि दरगाह षरीफ में कुछ खास किया जाए। यहां के इंतजामात को और बेहतर किया जाए। जायरीन को बेहतरीन सुविधाएं दी जाएं। इसके अतिरिक्त दरगााह षरीफ, ख्वाजा साहब और सूफीज्म पर एक ऐसी वेब साइट बनाई जाए, जिसके जरिए पूरी दुनिया के लोगों को न केवल यहां के बारे में सब कुछ जानने का मौका मिले, अपितु हर आम ओ खास तक सूफीज्म का संदेष दिया जा सके। इतना ही नहीं, इस्लाम पर भी एक पुस्तक बनाने की इच्छा है, ताकि अनेक प्रकार की भ्रांतियां दूर की जा सकें। वेब साइट व लेखन के इस पाकीजा काम में सहयोग करने में मैने उनको वचन दिया। मगर अधिकतर समय कोराना में जाया हो जाने के कारण वह पूरा नहीं कर पाया, जिसका मुझे बेहद अफसोस है।
ऐसा नहीं है कि जनाब अष्फाक हुसैन को पहली बार विपरीत हालात से मुकाबिल होना पडा। इससे पहले भी जब वे अजमेर नगर सुधार न्यास के सचिव थे, तब भी एक वाकया हुआ था, जिस पर मैने तब ऊंट पर बैठे अश्फाक को काट खाया कुत्ता हैडिंग से एक ब्लॉग लिखा था।

आइये, देखते हैं उसमें क्या लिखा था
कहते है जब बुरा वक्त आता है तो ऊंट पर बैठे आदमी को भी कुत्ता काट खाता है। आप कहेंगे कि ऊंट पर बैठे आदमी को कुत्ता कैसे काट सकता है? असल में जब कुछ बुरा वक्त आता है तो ऊंट जमीन पर बैठ जाता है और उसी वक्त मौका देख कर कुत्ता काट खाता है। ऐसा ही कुछ हो रहा है इन दिनों नगर सुधार न्यास के सचिव अश्फाक हुसैन के साथ।
कभी तेज-तर्रार अफसर के रूप में ख्यात रहे अश्फाक हुसैन दोधारी तलवार की धार पर से गुजरने वाले दरगाह नाजिम पद पर बिंदास काम कर चुके हैं। दरगाह दीवान और खादिमों के साथ तालेमल बैठाने के अलावा दुनियाभर से आने वाली तरह-तरह की खोपडिय़ों से मुकाबला करना कोई कठिन काम नहीं है। पिछले कुछ नाजिम तो बाकायदा कुट भी चुके हैं, मगर अश्फाक ने बड़ी चतुराई से इस पद को बखूबी संभाला। किसी के कब्जे में न आने वाले कई तीस मार खाओं को तो उन्होंने ऐसा सीधा किया कि वे आज भी उनके मुरीद हैं।
इन दिनों अश्फाक ज्यादा उखाड़-पछाड़ नहीं करते, शांति से अफसरी कर रहे हैं, मगर वक्त उन्हें चैन से नहीं रहने दिया जा रहा। सबसे ज्यादा परेशानी संभागीय आयुक्त अतुल शर्मा से ट्यूनिंग नहीं हो पाने की वजह से है। और तो और, कांग्रेसी भी उनके पीछे पड़ गए हैं। न्यास की पृथ्वीराज नगर योजना में पात्र आवेदकों को भूखंड नहीं देने
और भूमि के बदले भूमि का आवंटन न करने को लेकर पहले तो एक अखबार में लंबी-चौड़ी खबर छपवाई और फिर दूसरे ही दिन उनके चैंबर में जा धमके। पहले तो वे कांग्रेसियों के गुस्से को पीते रहे, मगर जैसे ही उनके मुंह से निकला कि वे तो प्रस्ताव बना कर कई बार जयपुर के चक्कर लगा चुके हैं, सरकार आपकी है, वहीं मामले अटके हुए हैं तो कांग्रेसी भिनक गए। उन्होंने इसे अपनी तौहीन माना। सरकार से तो लड़ नहीं सकते, अश्फाक पर ही पिल पड़े। हालात इतने बिगड़ गए कि कांग्रेसियों ने उन्हें इस कुर्सी पर नहीं बैठने देने की चेतावनी तक दे डाली। कांग्रेसियों व उनके बीच टकराव की असल वजह क्या है, अपुन को नहीं पता, मगर लगता है मामला प्रॉपर्टी डीलरों से टकराव का है।
खैर, कांग्रेसियों के हमले पर अपुन को याद आया कि ये वही अश्फाक हुसैन हैं, जिनकी गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अपेक्षित एक सौ एक नानकरामों में से एक नानकराम को कांग्रेस का टिकट मिला था। गहलोत उनसे इतने खुश हुए कि अपने गृह जिले जोधपुर ले गए।
बहरहाल ताजा मामला भी पिछले वाकये जैसा है। वे दरगाह षरीफ में कुछ अच्छा करना चाहते थे, मगर कुछ ताकतों को यह नागवार गुजरा। दरगाह कमेटी के सदर से नाइत्तफाकी भी इसकी एक वजह रही। उन्हें ऐसे विवाद में उलझाने की कोषिष की गई, जिस पर किसी को यकीन नहीं हो रहा।
आखिर में एक तथ्य का जिक्र किए देते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में उनके कांग्रेस के टिकट पर पुश्कर विधानसभा सीट से चुनाव लडने की चर्चा थी। अब देखते हैं कि आगे क्या वे राजनीति की ओर रुख करेंगे या कुछ और।

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