वास्तु का बहुत महत्व है। इन दिनों इसका चलन बढा भी है। मैने इसे साक्षात अनुभव किया है। हुआ यूं कि मैने मकान बनाने से पहले वास्तु षास्त्र का थोडा अध्ययन किया। मेरे वरिश्ठ मित्र स्वर्गीय आर डी कुवेरा के जरिए किषनगढ के एक वास्तुविद से संपर्क किया। उन्होंने जिन जिन बातों का ख्याल रखने को कहा, मैंने उसी के अनुरूप नक्षा बनवाया। मकान बन कर पूरा होने पर उन्हीं वास्तुविद से ग्रह प्रवेष अर्थात नांगल का यज्ञ अनुश्ठान वास्तु अनुरूप करवाया। खैर, बाद में एक बडा प्लाट मिलने पर वहां नया मकान बनाने का विचार किया। उसके लिए मौजूदा मकान बेचने की कवायद षुरू की। सारे दलालों से संपर्क किया। एक साल तक सारे प्रयासों के बावजूद मकान नहीं बिका। इस पर पुश्कर के एक ज्योतिर्विद से संपर्क साधा। वे स्वयं मेरे घर आए और ज्योतिशीय गणना के बाद बताया कि यह छत आपके सिर पर रहेगी, मकान नहीं बिकेगा। उसकी वजह यह है कि आपने वास्तु षास्त्र के अनुसार बहुत मजबूत यज्ञ करवाया है। हालांकि अब भी संभव है कि इससे मुक्ति मिल जाए, मगर उसके लिए इसके ब्रह्म स्थान की खुदाई करवा कर उपाय करना होगा। मैं इसके लिए तैयार नहीं था। कुल जमा इस वाकये से वास्तु षास्त्र पर मेरा यकीन और मजबूत हो गया।