भाटी के जन्मदिन ने कांग्रेस को दिखाया आईना
कांग्रेस के कद्दावर नेता, प्रसिद्ध व्यवसायी और समाजसेवी हेमंत भाटी के जन्मदिन पर उनके आवास पर उमड़ी शुभचिंतकों की भीड़ ने स्थानीय कांग्रेस की राजनीति में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश जरूर छोड़ दिया। जन्मदिन का आयोजन भले ही व्यक्तिगत अवसर था, लेकिन वहां दिखाई दिया जनसमर्थन आगामी नगर निगम चुनाव के राजनीतिक समीकरणों को समझने वालों के लिए महज सामाजिक उपस्थिति नहीं माना जा सकता।
दिलचस्प संयोग यह रहा कि वार्ड संख्या 48-49 में कांग्रेस आपके द्वार कार्यक्रम के तहत दौरे पर निकले शहर कांग्रेस अध्यक्ष राजकुमार जयपाल, धर्मेंद्र राठौर, रामचंद्र चौधरी सहित कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का दल भी हेमंत भाटी को शुभकामनाएं देने उनके आवास पहुंचा। राजनीतिक रूप से यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई क्योंकि लोकसभा चुनाव के दौरान भाटी के कथित असहयोग को लेकर रामचंद्र चौधरी की नाराजगी सार्वजनिक चर्चा का विषय रही है। ऐसे में उनका भाटी के आवास पर पहुंचना स्थानीय कांग्रेस की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत माना जा सकता है।
राजनीति में व्यक्तिगत रिश्ते और राजनीतिक मतभेद अक्सर समानांतर चलते हैं। चुनावी प्रतिस्पर्धा के दौरान पैदा हुई नाराजगी हमेशा स्थायी राजनीतिक दूरी में बदल जाए, यह जरूरी नहीं। भाटी के जन्मदिन पर कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी इसी राजनीतिक व्यवहारिकता की ओर इशारा करती है।
हालांकि जयपाल-राठौर खेमे के साथ दिखाई देने वाली टिकट के दावेदारों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की भीड़ को सीधे जनाधार का पैमाना मानना जल्दबाजी होगी। चुनाव के समय टिकट की आकांक्षा रखने वालों की भीड़ स्वाभाविक राजनीतिक प्रक्रिया है। इसके विपरीत किसी नेता के निजी सामाजिक अवसर पर बिना टिकट और पद की प्रत्यक्ष अपेक्षा के पहुंचने वाले समर्थकों की संख्या उसके व्यक्तिगत सामाजिक प्रभाव का अलग संकेत देती है।
यही वह बिंदु है जहां हेमंत भाटी की राजनीतिक उपयोगिता को नजरअंदाज करना कांग्रेस के लिए जोखिम भरा हो सकता है। नगर निगम चुनाव केवल पार्टी के चुनाव चिह्न पर नहीं लड़े जाते। वार्ड स्तर पर उम्मीदवार की व्यक्तिगत स्वीकार्यता, सामाजिक संपर्क, स्थानीय संगठन और मतदाताओं के बीच उसकी पकड़ भी परिणाम को प्रभावित करती है। ऐसे में भाटी जैसे प्रभावशाली स्थानीय चेहरे की नाराजगी कांग्रेस के लिए कितनी महंगी पड़ सकती है, इसका वास्तविक आकलन चुनावी मैदान में ही होगा।
यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि किसी एक जन्मदिन की भीड़ को पूरे शहर में किसी नेता के निर्विवाद जनाधार का प्रमाण मान लेना भी तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा। भीड़ राजनीतिक प्रभाव का संकेत हो सकती है, लेकिन चुनावी ताकत का अंतिम प्रमाण मतदान परिणाम ही होता है।
फिर भी हेमंत भाटी के जन्मदिन ने कांग्रेस के सामने एक असहज सवाल जरूर खड़ा कर दिया हैकृक्या पार्टी टिकटों की गणित में इतनी व्यस्त हो जाएगी कि उन चेहरों की सामाजिक ताकत को नजरअंदाज कर दे, जिनके बिना कई वार्डों में चुनावी समीकरण अधूरे रह सकते हैं?
जयपाल-राठौर धड़े के आसपास टिकट के इच्छुक लोगों की भीड़ कांग्रेस की संगठनात्मक सक्रियता दिखाती है, लेकिन भाटी के आवास पर जुटे शुभचिंतकों ने व्यक्तिगत प्रभाव और सामाजिक स्वीकार्यता की अलग तस्वीर पेश की है। आगामी नगर निगम चुनाव में यदि कांग्रेस भाटी को साथ लेकर चलती है तो यह उसके लिए अतिरिक्त राजनीतिक ताकत बन सकती हैय यदि नाराजगी बनी रहती है तो उसका असर कुछ वार्डों से आगे भी दिखाई दे सकता है।
इसलिए फिलहाल यह कहना अधिक उचित होगा कि हेमंत भाटी कांग्रेस के लिए अनिवार्य नहीं तो निश्चित रूप से नजरअंदाज करने योग्य चेहरा भी नहीं हैं। जन्मदिन के बहाने उनके आवास पर उमड़ी भीड़ ने पार्टी नेतृत्व को एक राजनीतिक संदेश दे दिया हैकृनगर निगम का बोर्ड केवल टिकट बांटने से नहीं, बल्कि स्थानीय प्रभावशाली शक्तियों को साथ लेकर ही बनाया जा सकता है।
रुक्मा पुत्र ऋषि