अजमेर नगर सुधार न्यास के भूतपूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय श्री धर्मेष्ज्ञ जैन के पुत्र अमित जैन को राजनीति में उपलब्धि हासिल करने के लिए अब अधिक संघर्श करना पड रहा है। जब तक स्वर्गीय श्री जैन हयात थे, जीवन के अंतिम क्षणों तक वे इसी प्रयास में रहे कि अपने पुत्र को अजमेर विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष या कोई और महत्वपूर्ण राजनीति पद दिलवा सकें। वे सफलता के करीब थे, मगर सरकार ने ही नियुक्यिों के द्वार बंद रखे थे। बार बार नियुक्तियों में रूकावट आ जाती थी। जब सरकार नियुक्तियों की कवायद लगभग पूरी कर चुकी थी, तब निकाय व पंचायत चुनाव की बाधा आ गई। इस बीच स्वर्गीय श्री जैन गंभीर रूप से बीमार हो गए। और वे चाह कर भी कुछ नहीं कर पाए। हकीकत तो यह है कि वे स्वयं ही प्राधिकरण का अध्यक्ष बनना चाहते थे, क्योंकि उनका न्यास अध्यक्ष का पिछला कार्यकाल राजनीतिक शड्यंत्र के चलते पूरा नहीं हो पाया था। यह विडंबना ही थी कि जब भाजपा की सरकार थी, तब उन्हें फर्जी सीडी उजागर होने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के दबाव में इस्तीफा देना पडा, और कांग्रेस सरकार में उन्हें क्लीन चिट मिल गई। जब दुबारा भाजपा की सरकार आई तो उनकी उम्मीद जागी कि उन्हें फिर से अध्यक्ष बनाया जा सकता है। प्रयास भी खूब किए। संघ का भी आषीर्वाद रहा, मगर राजनीतिक समीकरण अनुकूल नहीं बन पाए। इस पर उन्होंने अपने पुत्र अमित जैन के लिए प्रयास षुरू कर दिए। वे जब भी किसी बडे नेता से मिलते तो अमित को भी साथ ले जाते। सफलता के करीब भी पहुंचे, मगर षायद उनके भाग्य में राजयोग नहीं था। इसी बीच अस्वस्थ होने और फिर देहावसान हो जाने के बाद अमित जैन सांप सीढी के खेल की तरह वापस नीचे आ गए। अब फिर नए सिरे से प्रयास कर रहे हैं। स्वर्गीय श्री जैन के प्रभावषाली मित्रों का भी साथ मिल रहा है, मगर पहले जैसी बात कहां। काष्ज्ञ, जीवित रहते स्वर्गीय श्री जैन मनोकामना पूरी कर पाते। आज निष्चित ही अमित जैन पिताश्री का अभाव गहरे से अनुभव कर रहे होंगे। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी है। वे अब भी पार्टी व सरकार के कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय बने हुए हैं। बहुधा मंचों पर नजर आ जाते हैं।