आखिर इस हादसे का कौन है जिम्मेदार?

-अमृतसर के रेल हादसे की कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं
-आखिर क्यों फेल हो गया जिला, पुलिस व स्थानीय प्रशासन के साथ रेलवे का सूचना तंत्र

प्रेम आनंदकर
जी हां, यही सवाल बार बार कौंध रहा है कि पंजाब के अमृतसर में विजय दशमी के दिन 19 अक्टूबर की रात रावण दहन के वक्त हुए रेल हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है। इस हादसे में करीब 65-70 लोगों की मृत्यु हो गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए। हादसा बड़ा भारी था और इससे पूरा देश अचंभित, अवाक व बहुत ज्यादा दुखी है। लेकिन इसके बावजूद नेता राजनीति करने और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने से तनिक भी बाज नहीं आ रहे हैं। वैसे तो इतना बड़ा हादसा होने पर रेल मंत्री को खुद अमृतसर पहुंचना चाहिए, लेकिन अपने राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को भेजा, जो मृतकों के परिजन व घायलों के आंसू पोंछने की बजाय रेलवे की हिमायत लेने में मशगूल रहे। वैसे देखा जाए, तो इस हादसे की जिम्मेदारी से ना आयोजक, ना पंजाब की कांग्रेस सरकार और ना ही केंद्र सरकार के अधीन रेल मंत्रालय बच सकता है। फिर भी अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। जहां सिन्हा सारा ठीकरा अमृतसर के जिला व स्थानीय प्रशासन व आयोजकों पर फोड़ रहे हैं, तो वहां के लोग व नेता सीधे तौर पर रेलवे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इस मामले की जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। जांच में ही यह साफ होगा कि किस स्तर पर हुई चूक या गलती के कारण इतने लोगों की जान गई। लेकिन इस बात से इंकार करने का भी कोई कारण नजर नहीं आता कि इसमें आयोजकों के साथ साथ अमृतसर के जिला, पुलिस व स्थानीय प्रशासन और रेलवे की भी बराबर की जिम्मेदारी है। यह बात अभी तक समझ नहीं आ रही है कि यह सभी पक्ष अपनी जिम्मेदारी से भाग क्यों रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि अमृतसर में जिस जगह रावण दहन हो रहा था, वहां पहली बार हुआ हो। हर साल वहां रावण दहन होता रहा होगा। पहले कभी कोई छोटी-मोटी घटना नहीं हुई। फिलहाल सवाल यह कारण खोजने का भी है कि इस बार ऐसी कौनसी चूक, गलती या खामी रही, जिसकी वजह से इतना भीषण हादसा हुआ और इतनी बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए। यह बात भी तय है कि किसी भी बड़े आयोजन के लिए जिला व स्थानीय प्रशासन से पहले मंजूरी ली जाती है। प्रशासन सुरक्षा सहित कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ही मंजूरी देता है। साथ ही आयोजकों को इस सम्बंध में सभी जरूरी पक्षों को जानकारी व सूचना देने की हिदायत भी देता है। अव्वल तो यह सवाल भी उठता है कि प्रशासन ने रेलवे ट्रैक के पास इतना बड़ा आयोजन करने की मंजूरी कैसे दे दी। यदि मंजूरी दे भी दी तो खुद जिला, पुलिस व स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की और इसकी जानकारी रेलवे को क्यों नहीं दी। रेलवे भी इस आयोजन से बिल्कुल अनजान नहीं रहा होगा। उसने रेलवे ट्रैक के पास हजारों लोगों की भीड़ होने पर रेल यातायात को कंट्रोल करने की व्यवस्था क्यों नहीं की। क्या रेलवे का सूचना तंत्र इतना कमजोर है, जो उसे ट्रैक के पास भीड़ होने की जानकारी नहीं मिली। इन सवालों के जवाब तो मिलते रहेंगे। फिलहाल अमृतसर के जख्मों पर मरहम लगाने की जरूरत है। यह वक्त किसी पर आरोप-प्रत्यारोप करने का नहीं, लोगों के आंसू पोंछने का है। हादसे में मारे गए लोगों को विनम्र श्रद्धांजलि। घायलों के जल्द ठीक होने की ईश्वर से प्रार्थना।

-प्रेम आनन्दकर, अजमेर, राजस्थान। सम्पर्क-08302612247

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