बयानबाजी के बीच गौण होते जनमुद्दे

ऽ बाबूलाल नागा ऽ
राजस्थान के विधानसभा चुनाव के शुरुआती दौर से अब तक अगर प्रदेश की तमाम चुनावी गतिविधियों पर नजर डालें, तो हमें पता चलता है कि हमारे प्रदेश में नेताओं के भाषणों में भड़काऊ और किसी नेता के प्रति व्यक्तिगत बयानबाजी के अलावा कुछ भी सही नहीं हो रहा है। चोर, बिच्छु, जोकर जैसे उपयोग में लिए जा रहे शब्द तो नेताओं की ओर से दिए जा रहे भाषणों की एक बानगी है।
इस बार विधानसभा चुनाव चुनाव के दौरान जिस तरह के बोल, भाषण और धमकियां दी जा रही हैं, उससे राजनीतिक मर्यादाएं तार-तार हो रही हैं। चुनावी सभाओं के दौरान नेताओं की भडकाऊ भाषणबाजी और एक दूसरे पर बदजुबानी थमने का नाम नहीं ले रही है।
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में हो रहे पांच विधानसभा चुनावों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। इस बार के चुनाव में रिकाॅर्ड तोड़ मतदान भी हो रहा है लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान नेता एक दूसरे पर जिस तरह से बरस रहे हैं और आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, उससे भारतीय लोकतंत्र की छवि भी बिगड़ रही है। कोई किसी को टुकड़े-टुकड़े करने की धमकी देता है तो कोई चुनाव बाद कौन किसके टुकड़े करता है ऐसा कहकर धमका रहा है। हाल में अलवर के रामगढ़ विधायक ज्ञानदेव आहुजा का एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में वह कहे रहे हैं कि सांप का फन दो बार कुचल दिया, अब नागिन की बारी है। उल्लेखनीय है कि रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से दो बार जुबेर खान हारने के बाद अब उनकी पत्नी मैदान में है। कुछ दिन पूर्व धौलपुर में भाजपा के पूर्व विधायक जसवंत सिंह गुर्जर ने कहा था कि अगर मेरे किसी कार्यकर्ता को उंगली लगा दिया तो मैं उसका हाथ काट दूंगा। एक भी कार्यकर्ता से तू कह दिया तो घर से नहीं निकलने दूंगा और लाशें बिछा दूंगा। यह दो बयान तो महज एक उदाहरण भर है। ऐसी बयानबाजी इन दिनों हमें खूब सुनने को मिल रही है। मानो इन नेताओं ने अपनी जुबान को चुनावी हथियार बना लिया हो। कोई किसी के ससुराल के बारे में पूछ रहा है तो कोई किसी की मां-बाप की जाति। धर्म और गोत्र की बातें भी खूब पूछी जा रही हंै। भाजपा और कांग्रेस ज्यादातर एक दूसरे से उन बयानों को लेकर उलझ रही हैं जिनका स्थानीय मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं है।
15वीं विधानसभा चुनाव में कुछ ऐसीे ही जमकर अनर्गल बयानबाजी हो रही है। चुनाव आयोग तक शिकायतें भी पहंुच रही हैं लेकिन इन नेताओं की पार्टी उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। हर पार्टी ऐसे विवादित बयान से पल्ला झाड़ लेती है और कह दिया जाता है कि पार्टी बयान से सहमत नहीं है। न भाजपा ने और ना ही कांग्रेस ने अपने किसी नेता पर कोई कार्रवाई की है। नेता और उम्मीदवार भड़काऊ भाषण देकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं और उनकी पार्टियां चुप्पी साधे हुए हैं। नेताओं की ऐसी बयानबाजी के बीच मुद्दे पीछे छूट गए हैं। प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर एक भी बड़ा नेता कुछ नहीं बोल रहा है। अगर कुछ बातें हो रही है तो जाति और धर्म की। बयानबाजी के बीच जनता के मुद्दे फिर से गुम हो गए है। मानो भाषण और आरोप-प्रत्यारोप के बीच ये चुनाव लड़ा जा रहा हो। प्रदेेश की जनता से जुड़े मसले सŸाा की राजनीति से गायब है। विपक्ष की राजनीति भी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तक सिमट गई है। बहरहाल, चुनाव का एजेंडा भ्रष्टाचार, महंगाई, सांप्रदायिकता, विकास, रोजगार और राष्ट्रीय और सामाजिक सुरक्षा न होकर व्यक्तिगत हमले हो गया है। चुनाव आरोप प्रत्यारोप पर केंद्रित हो गए है और अभद्र भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। लोकतंत्र में सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मर्यादा का पालन ही नहीं किया जाए।

(लेखक विविधा फीचर्स के संपादक हैं) (संपर्क- 335, महावीर नगर, सेकंड, महारानी फार्म, दुर्गापुरा, जयपुर-302018 फोनः 0141-2762932 मोबाइल-9829165513)

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