
-रेणु शर्मा, ब्यावर – आज पैसा विभिन्न बीमारियों के उपचार पर पानी की तरह बहाया जा रहा है। मगर फिर भी मानव शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ नही हो पाया है। लेकिन योग ही एकमात्र ऐसा उपचार हैं जिसके द्वारा सम्पूर्ण शारीरिक और मानसिक व्याधियों का समाधान संभव हैं। योग हमारे देश में प्राचीन काल से चली आ रही विद्या है। जो वर्षों तक हमारे देश से लुप्तप्राय सी हो गयी थी। कुछ विशेष लोगों द्वारा ही योगिक क्रियाएं की जाती थी ऐसा कहंा जाता था की किसी योग गुरू के सानिध्य में ही योग करना चाहिये , बिना गुरू के गलत योगिक क्रियाएं करने से योग लाभ पहुंचाने के बजाय हानि पहुंचा सकता हैं एंव योग का उल्टा असर भी हो सकता है। जब से योग गुरू बाबा रामदेव द्वारा स्थान-स्थान पर योग के शिविर लगा कर लोगों को योग के महत्व के बारे में बताने के साथ-साथ योगिक क्रियाओं को सिखाना प्रारम्भ किया हैं तब से लोगों में योग के प्रति जागृति आयी और की योग के प्रति उनकी सोच , उनकी मानसिकता में बदलाव आया । जब लोगों ने प्रत्यक्ष देखा की योग से असाध्य रोग सही हो रहे हैं और मनुष्य शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हो रहे हैं तो लोगों का समूह बाबा रामदेव द्वारा चलाये जा रहे योग आन्दोलन से जुडते जा रहे हैं । आज हम देख रहे कि हमारे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लाखों लोग बाबा रामदेव के योग आन्दोलन से जुड़ कर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं । भारत में ही नहीं विश्व स्तर पर भी लोगों ने योग का महत्तव जाना और समझा है जिससे जगह-जगह संगठन बनाकर , टेलीविजन के माध्यम से बहुत से लोग योग से जुड़ रहे हैं और स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं । ऐसे में संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय समाज को योग के बारे में जागृत करना एक अपने आप में एक सार्थक प्रयास हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रत्येक साल विभिन्न बिमारियों की रोकथाम के लिये करोड़ों रूपये की राशी खर्च कर देता हैं यदि इस राशी का कुछ हिस्सा योग के प्रचार-प्रसार पर खर्च किया जावे तो अन्तर्राष्ट्रीय क्षेत्र में मानव के स्वास्थ्य संबधी बीमारियोंं में सुधार लाया जा सकता हैं। अत: समय की मंॉग को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा योग को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाना प्रारम्भ किया जाना चाहिये। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी ने संयुक्तराष्ट्रसंघ की महासभा को अपने भाषण में योग को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की संयुक्त राष्ट्रसंघ जो अपील कि हैं वो तभी दमदार होगी जब वो अपने देश के सभी विद्यालयों में योग शिक्षा अनिवार्य करने के साथ-साथ योग के प्रचार-प्रसार के लिये काम करने वाली स्वंय सेवी सस्थाओं प्रोत्साहित करे ।