पुस्तक समीक्षा
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पुस्तक-परिचय
“बस तुम्हारे लिए” (कविता-संग्रह)
लेखक : मीनाक्षी सिंह
ई-मेल:[email protected]
प्रकाशक: अंजुमन प्रकाशन, 942 आर्य कन्या चौराहा
मुट्ठी गंज,इलाहबाद – 211003
संस्करण: प्रथम 2017
मूल्य: 120/ रुपए
पृष्ठ: 120
मुझे आज ही मीनाक्षी सिंह का प्रथम कविता संग्रह “बस तुम्हारे लिए” मिला l आभार l
मीनाक्षी सिंह को मैं करीब 5 वर्षो से सोशल मीडिया के माध्यम से जानता हूँ हालाकिं मेरा उनसे मिलना कभी नहीं हुआ l इनकी हर रचना मैं पढ़ता रहा हूँ और लगभग हर रचना पर हमारा वार्तालाप होता रहा हैं l यह विभिन्न न्यूज़ पेपर, पत्रिकाओं में लिखती रही हैं l मुझे ध्यान हैं एक बार साहित्यकारों के आयोजन में, मैने कहाँ था देश में छुपी प्रतिभाओ को आगे लाना ऐसे आयोजनों का उद्देश्य होना चाहिए, यह बात कई गुमनाम साहित्यकारों के साथ-साथ मीनाक्षी सिंह को भी जेहन में रख कर कही थी l मैने पिछले 5 वर्षो में मीनाक्षी सिंह की कवितायेँ, कहानी, आलेख पढ़े हैं l मीनाक्षी सिंह की अधिकतर रचना समय को लांघकर रची गई सशक्त कृति, सरसता, रोचकता एवं सहजता से गुंथी हुई होती हैं l आज के सन्दर्भ में यह कविता संग्रह “बस तुम्हारे लिए” जनमानस को बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता है l
“बस तुम्हारे लिए” मीनाक्षी सिंह का पहला कविता संग्रह है l मीनाक्षी सिंह अपने प्रथम कविता संग्रह की कविताओं में, वे जिस तरह रिश्तों और मानवीय संबंधों की कड़ी पड़ताल करती हैं, वह हैरानी भरा है l इन कविताओं में मुख्यतः आधुनिक जीवन में बदलते रिश्तों और संवेदनाओं को पकड़ने की भरपूर कोशिश गई है l
मीनाक्षी सिंह का कविता संग्रह निश्चय ही पठनीय है और विचारणीय भी l प्रस्तुत कविता संग्रह में मीनाक्षी सिंह की 68 कविताएं हैं । ये सभी कविताएं मन का बहुत स्नेह से स्पर्श करती हैं और फिर पढने वाले को अपना बना लेती हैं । पढऩे वाला प्रसन्न हो जाता है । उसे प्रसन्नता इस बात की भी होती है कि उसके कीमती समय की कीमत कुछ बेशकीमती कविताओं के साथ संपन्न हुई l सबसे खास बात इस कविता संग्रह का यह है इसमें हर तरहा की कविताये हैं l

अशोक लोढ़ा
नसीराबाद (राजस्थान)