अभी तो गरज है, सब याद आएंगे

सभी दलों के नेताओं, मंत्रियों, विधायकों और टिकट के दावेदारों को याद आ रहे हैं सभी देवी देवता, महापुरुष, वीर योद्धा व वीर नारियां, विधानसभा चुनाव जो आ गए हैं

प्रेम आनंदकर
जी हां, यह बिल्कुल सही बात है। यकीन ना हो तो सोशल मीडिया की किसी भी साइट पर चले जाइए। भाजपा, कांग्रेस सहित अन्य दलों के नेताओं, पूर्व व वर्तमान मंत्रियों, पूर्व व मौजूदा विधायकों, टिकट के दावेदारों, निर्दलीय चुनाव लड़ने का मानस रखने वालों की पोस्ट देख लीजिए। कमोबेश सभी रोजाना किसी ना किसी महापुरुष को जयंती या पुण्यतिथि पर नमन करते हुए मिल जाएंगे। देवी देवताओं को धोक लगाते हुए दिख जाएंगे। बेचारे जिन महापुरुषों व नारियों को पूरे पांच साल तक कभी याद नहीं किया, उनकी तस्वीरें पता नहीं, कहां कहां से ढूंढ कर फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और वाट्सअप पर पोस्ट कर रहे हैं। तस्वीरों के नीचे इतने सुंदर शब्दों में उद्गार भी लिख रहे हैं, मानो इन जैसा तो कोई समर्पित है ही नहीं। जिन देवी देवताओं की तस्वीरों पर कभी अगरबत्ती भी नहीं जलाई होगी, उनकी तस्वीरों पर सोशल मीडिया पर बाकायदा आरती उतारी जा रही है। कुछ दावेदार और चुनाव लड़ने के इच्छुक तो पिछले एक डेढ़ महीने से अपनी फोटो के साथ उपदेशों वाली पोस्ट भी धड़ाधड़ ऐसे परोस रहे हैं, जैसे ब्रह्मांड का सारा ज्ञान इन्हें ही हासिल हो गया और खुद गंगाजी नहाकर अब जमाने को ज्ञान बांटने निकले हैं। भाई हो ना हो, यह सब कमाल चुनाव का है। राजस्थान सहित पांच राज्यों में नवम्बर व दिसम्बर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। नेताओं के बदले रंग को देखकर यही सवाल मन में उठता है कि यदि चुनाव नहीं आएं तो यह नेता किसी देवी देवता या महापुरुष तो क्या जिंदा इंसानों को भी कभी नहीं पूछें। भला हो इस देश के लोकतंत्र का, जिसने हर पांच साल में नेताओं की आंखों से पट्टी खोलने की व्यवस्था कर दी, वरना यह मदहोश होकर किसी को बिल्कुल नहीं गांठते।

-प्रेम आनन्दकर, अजमेर, राजस्थान। सम्पर्क 08302612247

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