संतोष गंगेले कर्मयोगी के 38 बर्षो के त्याग परिश्रम की सामाजिक पत्रकारिता की कहानी

संतोष गंगेले
छतरपुर -वैसे तो प्रत्येक व्यक्ति , मनुष्य के जीवन जीने का अपना एक अंदाज होता है। यह भी बात सही है की जब किसी सामाजिक व्यक्ति या समाज सुधारक ,पत्रकार ,सैनिक ,सिपाही ,कर्मचारी ,अधिकारी ,राजनेता ,अभिनेता आदि -आदि व्यक्ति के बारे में जन चर्चा होना या चर्चा में आना ही उसके कर्मो और वाणी पर निर्भर करता है। जो व्यक्ति अपने पूर्वजो या बंश -खानदान के नाम से पहचाना जाता है वह व्यक्ति भारतीय संस्कृति ,संस्कारो और सभ्यता से बहुत दूर होता है। लेकिन जो व्यक्ति अपनी योग्यता ,हुनर और कार्य करने के कारण पहचान बनाता है उसे मानव सभ्यता ,मानवीय सरोकार और सामाजिक परिवेश में वह स्थान मिलता है जिसकी उसे स्वंम कल्पना नहीं होती है।
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला की तहसील क़स्बा नौगांव [बुन्देलखण्ड ] के एक छोटे से ग्राम बीरपुरा में अंग्रेजी तारिख 11 दिसम्बर 1956 को जुझौतिया ब्राह्मण परिवार में किसान संत परिवार जिस बालक का जन्म हुआ। उसकी दादी श्रीमती फूलबाई ने इस बालक का नाम बड़े ही सोच समझ कर संतोष रखा था। संतोष गंगेले के पिता अपने समय के किसान के साथ साथ एक कुख्यात व्यक्ति भी रहें। लेकिन पारिवारिक जुम्मेदारिओ के साथ परिवार का संचालन किया। संतोष गंगेले ने बचपन से ही संघर्ष और मुशीबतो के बीच अपने जीवन सँभालने का कार्य किया। सामाजिक और पारिवारिक कठिनाईओ की चुनौती को स्वीकार करते हुए शिक्षा ग्रहण की। बर्ष 1977 में आठवीं उत्तीर्ण करने के बाद आर्मी कालेज नौगाव में चौकीदारी का कार्य किया। दो बर्ष नौकरी करने के बाद दिल्ली में मजदूरी करने चले गए। वहां सामान्य मजदूरों के साथ मजदूरी करते रहें। लेकिन पढ़ने की ललक ने उनका आत्मबल बढ़ाया और जुलाई 1979 में नौगावं में संचालित बुन्देलखण्ड कोचिंग कॉलेज के माध्यम से सीधा 11 वी की परीक्षा दी। क्षय चिकित्सालय चौराहा नौगाव पर चाय -पान की गुमटी खोली और शिक्षा पुनः ग्रहण करना शुरू किया।
बर्ष 1980 अप्रेल में परीक्षा परिणाम उत्तम होने के साथ ही बी ए में प्रवेश लिया। घर परिवार के कार्य के साथ ही शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया। हिंदी टंकण प्रशिक्षण शुरू किया। मेहनत के कारण सफलताएं मिलती गई। इसी समय 10 दिसम्बर 1980 से दैनिक राष्ट्र भ्रमण छतरपुर समाचार पत्र से पत्रकारिता शुरू की। लगनशील पत्रकारिता के कारण दो बर्षो में छतरपुर ,रीवा ,टीकमगढ़ ,सागर ,झांसी। कानपुर दमोह ,जबलपुर ,भोपाल ग्वालियर आदि से प्रकाशित होने बाले दैनिक और साप्ताहिक समाचार पत्रों में अपना स्थान बना लिया।
जीवन संचालित करने हेतु छतरपुर जिला कलेक्टर श्री होशियार सिंह जी ने बर्ष 1983 में याचिका लेखक की अनुज्ञप्ति जारी की। 21 फरवरी बर्ष 1985 में बिबाह बहुत ही साधारण परिवार में किया। जिसकी समाज में बहुत ही सराहना हुई। बर्ष 1986 में पत्रकार शपथ ग्रहण समारोह के माध्यम से एक नया इतिहास रचा। अनेक कानूनी परेशानिओ से संघर्ष करते हुए। जीवन को आगे बढ़ाया। उनके कार्य शिक्षा ,स्वास्थ्य ,स्वच्छता ,समरसता ,समाज ,नशा मुक्ति ,सड़क दुर्घटनाओं को रोकने ,दहेज़ एक कलंक है बेटी बचाओ -बेटी पढ़ाओ ,समाज सुधार केलिए समय और परिस्थिओं के अनुसार बच्चो ,विधार्थीओ को प्रोत्साहित सम्मानित करते है। समाज में उत्तम सेवा और परोपकारी आमजन को भी सम्मानित करते आ रहें है।

विरोधीओ ने कईबार झूठे आपराधिक प्रकरण में उलझाया लेकिन न्याय के मंदिर से सही न्याय मिला। आज तक सैकड़ो परेशानिओ और कानूनी उलझनों के बाद भी सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा। [पत्रकारिता पर कभी कलंक नहीं लगने दिया। समाज सेवा देश भक्ति के लिए हमेशा कार्य करने बाले संतोष गंगेले कर्मयोगी के 38 बर्षो के त्याग परिश्रम की सामाजिक पत्रकारिता की कहानी बड़ी ही रोचक और प्रेरणा देने बाली है। लगभग 11 बर्षो से बुंदेलखंड क्षेत्र में भारतीय संस्कृति और संस्कारो को लेकर हजारो शिक्षण संस्थानों में अपने बिचारो से लाखों विधार्थीओ से मिले , उनको नैतिक शिक्षा के माध्यम से परिवार और समाज के लिए कार्य करते आ रहें है। मध्य प्रदेश ,उत्तरप्रदेश ,दिल्ली ,हरियाणा राजिस्थान राज्यों में उनको सम्मान दिया गया. . समाजसेवी संतोष गंगेले कर्मयोगी के नाम से निःस्वार्थ और परोपकारी समाजसेवी नागरिक के रूप में अपनी पहचान बना चुके है।

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