नये साल 2019 में अपने जीवन के अंदर लायें सफलता एवं खुशीयाँ

डा. जे.के.गर्ग
सच्चाई यही है कि आशा का जीवन काल अंनंत होता है वहीं दूसरी तरफ निराशा और असफलता का जीवनकाल अल्प एवं छोटा होता है, इसलिये ख़ुशी प्राप्त करने के लिए हमेशा आशावादी रहे ,निराशा को कभी भी अपनी सोच के नजदीक नहीं आने दे | सफलता और खुशी प्राप्त करने के वास्ते घनघोर अंधकार मे भी प्रकाश की किरणें की खोज करें | नकारात्मक सोच को छोड़ करके सकारात्मकता को अपनी सोच का अभिन्न अंग बनायें |छोटी से छोटी बातों में भी अच्छाई को ढूढें | याद रक्खे कि जीवन में खुशी प्राप्त करने के लिये दूसरों को भी यथाशक्ति खुश रखने का प्रयास करना जरूरी है | सच्चाई तो यही है कि खुशी हासिल करने के लिये अनुशासन, अनुकालता औ सामंजस्य के बीच संतुलन रखना जरूरी है |

खुशी आदमी के भीतर ही होती है तथा रिलेक्स मन ही प्रगति और खुशहाली का प्रवेशद्वार है | अपने आप से से वादा करें नये वर्ष में हर परिस्तिथी में आप शांत और रिलैक्स्ड रहेगें | रिलेक्स रहने के लिये गहरी स्वास ले ओर छोड़े | हर दिन का प्रारम्भ सकारात्मक सोच के साथ करे, यानी यह सोंचे की ख़ुशी मेरा मुलभुत अधिकार है | मै दिन भर खुश रहुगां | जब कभी कोई अनहोनी घटना घट भी जाये तब भी अपने आप को सकारात्मक सोच पर केन्द्रित करते हुयें अपने आप को समझाये कि मेरे साथ इससे भी बुरा हो सकता था |

याद रखे की अगर अग्रज अपनो से छोटे को स्नेह और प्यार देंगे तो छोटे भी आप को जरुर सम्मान देंगे और आप का आदर भी करंगे | बच्चो को उनके अपने हिसाब से जीने का मोका दे, उनके कार्यकलापों मै टीका टिप्पणी नहीं करें | आप उन्हें सलाह तभी ही दें जब वे आप से सलाह मांगे |

अपने पड़ोसी से नियमित बातचीत करे, उनके प्रति सद्भावना रखते उनके खुशी के लिये प्राथना करें | उनके सुख को बढाने और तकलीफों को कम करने की कोशिश करें इससे आपकी खुशियाँ कई गुणा बढ़ जायेगी और आपके पारस्परिक सम्बन्ध मधुर रहेगें | खुशी प्राप्त करने का एक सूत्र यह भी है की बिना किसी चाहत के दुसरे के अच्छे काम की जरुर प्रशंसा करें |

संभव है कि यदाकदा लालच कुछ समय के लिये आपकी सम्पती को बढा भी दे, किन्तु यह भी यह सच्च है कि अधिक सम्पति आपके लालच ओर आकांशा को कई गुणा जरुर बढा देती है, वहीं लालच और गलत तरीके से अर्जित यह कमाई आपको अभिमानी बना कर आपको गलत रास्ते पर ले जाकर आपकी मानसिक शांती को खत्म कर देगी | अपने जीवन मे अधिक और अधिक से अधिक प्राप्त करने की मनोवर्ती को छोड़े | जो आप के पास है उससे आप सदेव खुश रहे | जो सुख सुविधा के लिये भोतिक साधन आपके पास उपलब्ध नहीं उन्हें हांसिल करने लिये ख्याली खबाव बनाने के बजाय उन्हें प्राप्त करने के गम्भीर कोशिस कर मेहनत करें |

आप मानें या नहीं मानें किन्तु सच्चाई तो यही है कि “ सभी इन्सान और अन्य प्राणी अविनाशी पवित्र और शांती प्रिय आत्मायें हैं और परमपिता परमात्मा की संतान है , उनका कोइ रगं नहीं ना ही कोइ धर्म एवं लिंग है इसलिये उनसे मधुर समबन्ध बनायें | उनको धर्म का चेहरा तो समाज ने दिया है | याद रक्खें कोई धर्म आपस में घ्रणा और वैर करना नहीं सीखाता है क्योंकि हर धर्म के मूल में भाईचारा और प्रेम की भावना निहित है | आपस में वैमनस्य फेलाने का काम तो तथाकथित धर्म के ठेकेदार ही करते हैं | धार्मिक उन्माद से बचे | इसीलिए लिये किसी से भेदभाव नहीं करें वरन सभी को स्नेह, प्रेम और प्यार दें | दूसरों के दुःख-दर्द एवं पीड़ा को समझें, उनकी मदद करें, उनके दुःख एवं तकलीफों को दूर करने मै मदद करें | करुणामय बनें |

सुखमय जीवन जीने के लिये अपना लक्ष्य निर्धारित करें, उद्देश्यहीन जीवन नहीं जिए | ईर्ष्यालु नहीं बने,दूसरों की सफलता पर खुश हों, उन्हें बधाई दें | अपने ईगो को छोड़े, मै-मै की रट नही लगायें, वहीं अपने आपको नकारा और हिन् मानना छोड़े और अपने मन से कहें कि में मुझें सोपें गये सारे काम सफलतापूर्वक कर सकता हूँ | आराम तलब जिन्दगी नहीं जिए, कर्मशील बने |अपनी गलतियों को मानने में चूक नहीं करें क्योंकी आदमी को अपनी गलतीयों से जीवन का बड़ा सबक सीखने को मिलता है | दुसरों की गलतियों के लिये उन्हें माफ़ करें,फॉरगिव एन्ड फॉरगेट की निती को अपनायें | जीवन में घटित अवांचित दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को याद नहीं रक्खें, उन्हें भूल जायें |

याद रक्खें कि भावात्मक होकर लिये गये निर्णय कम ही सफल होते हैं इसीलिये चितन कर विवेक पूर्ण निर्णय लें |किसी से कोई अपेक्षा नहीं रक्खें और किसी की भी उपेक्षा भी नहीं करें | चिंतित नहीं रहें, और ना ही चिंता करें क्योंकिं “चिन्ता चिता से भी बुरी होती है,चिन्ता आपके जीवन के हर क्षण को दुखमय बना देगी, और सफलता के सारे दरवाजे भी बंद करदेगी |याद भी सही है कि चिन्ता आपके व्यकित्त्व को भी हानि पहुचायेगी, आप अपना आत्मविश्वास पूरी तरह से खो देगें, आप बीमारियों को निमन्त्रण देगें और अस्वस्थ रहगें | इसीलिये | चिंता करने के बजाय आत्मचिंतन करें |

आध्यात्मिक इन्सान बने | निरंतर मेडीटेसन का अभ्यास करें | मूखों से वादविवाद और तर्क-वितर्क करने से बचे | शक करने की आदत को छोड़े, हकीम लुकमान के पास भी शक का इलाज नहीं है | मधुर वाणी बोलें, कटु शब्दों का प्रयोग कभी नहीं करें |

जब आप क्रोधित हो तो अपने आप से कहे की ऐसा करने से मै अपने आप से ही लड़ाई कर रहा हू है और खुद अपना ही नुकसान कर रहा हूँ क्योकि क्रोध एक माचिस की तिली के समान है जो दूसरों को जलाने के पहिले खुद ही जलती है |

अपने आत्मसम्मान से कोई समझोता नहीं करें किन्तु आत्मअभिमानी नहीं बनें | स्वाभिमान के साथ जीये| अपने निकटम परिचीतों एवं स्वजनों की भावनाओं,आवश्यकताओं का ध्यान रक्खें,उनकी अनदेखी नहीं करें |डर के साये में नहीं जीये, डर आदमी की प्रगति और उन्नति में सबसे बड़ी बाधा है |

बुरा नहीं बोलें,बुरा नहीं कहें,बुरा नहीं सुने और बुरा नहीं देखें | दूसरों के कार्यों की आलोचना करने की जगह उनके अच्छे कामों की प्रशंसा करें |जो जैसा है उसे उसी रूप में स्वीकार करें |

दूसरों के विचारों का भी सम्मान करें, उन्हें आदर दें | कोई भी काम को अंजाम देने से पूर्व यह निच्चय कर ले कि आपके काम से किसी का अहित तो नहीं होगा |

हर एक व्यक्ति का अभिवादन मुस्करा कर करें | खुद हसें और दूसरों को भी हंसाये | अपने चेहरे को सोम्य बनाये रक्खें | खुद जियें और अन्य को भी सुखमय जीवन जीने दें | अपनी असफलताओं के लिये दूसरों को दोष नहीं दें | याद रखे,किताबे पढना एवं अध्यन करना हम सभी के लिए सबसे अच्छा ओर सबसे सस्ता मनोरंजन है |

डा. जे.के.गर्ग

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