*विचार – प्रवाह*

नटवर विद्यार्थी
“कालजयी” का शाब्दिक अर्थ जो किसी भी काल की सीमा में बध्द न हो अथवा जो इतिहास और भूगोल की सीमाओं को लांघ चुका हो यानि जो सदैव प्रासंगिक हो , शाश्वत हो । अपने देश- काल से आगे बढ़कर हर देश – काल के संदर्भ में सार्थक और समीचीन हो । इस प्रकार जो हर समय प्रासंगिक , सार्थक और समीचीन हो तथा मूल्यों के संवाहन में योगदान करे वह कालजयी बन जाता है ।
किसी भी राष्ट्र के उन्नयन के तीन स्तंभ है – समाज सुधारक , राजनीतिज्ञ और रचनाकार । आज़ादी का आंदोलन हो ,चाहे समाज में व्याप्त असमानता , शोषण या कुप्रथाएं । इन सबके लिए क़लम उठाकर आवाज़ उठाने वाले रचनाकार ही थे और उन्हें मूर्तरूप देने वाले समाज सुधारक व राजनेता थे । आज भारतीय ही नहीं विश्व इतिहास में वो कालजयी बन गए और युग प्रवर्त्तक कहलाए । कालजयी रचनाकारों , समाज सुधारकों एवं राजनेताओं को शत-शत वन्दन ।

– नटवर पारीक

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