मृत्युंजय

हम अमृत के पुत्र हमें ही, देखो है यह काल डराता,
महाकाल की धरा धाम पर, देखो हाहाकार मचाता।
तू क्षणभंगुर हम चिरजीवी, तू हमें हरा क्या पाएगा,
हम अनंत तू चीनी आइटम, तू यहां कहां टिक पाएगा।।ध्रु।।

भूमि यह जहां विश्व विजेता, घुटने टिका मांगते भीख,
जननी के पुरुषार्थ सपूतों, के आगे होते विनीत,
होगा बड़ा धुरंधर किन्तु, तू कुछ न यहां कर पाएगा।।1।।
तू क्षणभंगुर हम चिरजीवी…

हम सजग, रक्षक सजग है, है सजग नेतृत्व हमारा,
देव सजग, मानव सजग है, है सजग भगवान हमारा,
मन संकल्पित सामाजिक दूरी, संकट यह कट जाएगा।।2।।
तू क्षणभंगुर हम चिरजीवी…

आओ शत-शत कोटि अंतस में, एक दिव्य हुंकार भरें,
खोलें ह्रदय कपाट सभी हम, बंद स्वयं निज द्वार करें,
जिस पथ चल होंगे विजयी, वही राह भरत अपनाएगा।।3।।
तू क्षणभंगुर हम चिरजीवी…

राघव सी हम धरें प्रतिज्ञा, रणछोड़ समान उपाय करें,
भैरव मर्दन करने हेतु, गर्भजून में वास करें,
रहें घरों में बने सुरक्षित, वह कालयवन मर जाएगा।।4।।
तू क्षणभंगुर हम चिरजीवी…

सूर्यप्रकाश ‘सूरज’

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