खुशहाल जिन्दगी का रहस्य हंसना मुस्कराना हंसे और हंसाये part 2

dr. j k garg
सच्चाई तो यही है कि परमपिता परमात्मा ने केवल इन्सान को ही हंसी-मुस्कराहट का जन्मजात अमूल्य उपहार एवं विशेषाधिकार प्रदान किया है | जो इन्सान मुस्कराते और हंसते हुये जिन्दगी जीता है वो ना तो निराश होता है और ना ही निराशा की बात करता है | मुस्कराने वाले का मन हमेशा खुश रहता है,यही प्रसन्नता की भावना उसके मन में उत्साह और सोहार्द की तरंगे उत्पन्न करके उसकी बुध्दि को निर्मल बनाती है। वास्तव में सुखमय जीवन को जीने की पहली शर्त है “हंसते हुए जीना |मुस्कराते हुए लोग निश्चिन्त हो कर बड़े-बड़े संकटों को आसानी से पार कर आगे बढ़ते जाते हैं।यदि कोई आपसे नाराज है तो मुस्कराकर आप उसके मन को भी जीत सकते हैं । हंसना मुस्काना सभी के लिए सबसे आसन एवं सरल है, क्योंकि हंसने के लिए न तो किसी प्रशिक्षण की जरूरत होती है और नही किसी नियम की। बस, अपने आसपास नजरें घुमाओ और तैयार हो जाओ हंसने के लिए। जीवन हंसी के महासागर से भरपूर है, बस जरूरत है तो उस में डूबकर तैरने की। मुस्कराहट बिखेरें तो दुःख निराशा– का आभास और अनुभूति कम हो जाती है | हंसने में कंजूसी आपके अच्छे स्वास्थ्य के लिए शर्तिया हानिकारक है। इसलिए हर व्यक्ति को संकल्प लेना चाहिये कि वे स्वयं मुस्करायेगें—हंसेगे औ दूसरों को भी हंसायगें क्योंकि सुखी जीवन का राज है हंसना और हंसाना। डा.जे.के. गर्ग

सन्दर्भ—–डॉ टी एस दराल, चंचल मल चोर्डिया, मेरी डायरी के पन्ने, विभिन पत्र पत्रिकाएँ

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