खुशहाल जिन्दगी का रहस्य हंसना मुस्कराना हंसे और हंसाये part 5

हंसना हंसाना भी है एक चिकित्सा

dr. j k garg
स्ट्रेस, तनाव, चिंता, भय, क्रोध, निराशा, चिड़चिड़ापन, हड़बड़ी, अधीरता आदि नकारात्मक प्रवृत्तियों से हमारी अंतःस्रावी ग्रन्थियाँ खराब होती है जो शरीर में विभिन्न रोगों को निमन्त्रण देने में मुख्य भूमिका निभाती है। यदि हमारा चेहरा सदैव मुस्कराता हुआ प्रसन्नचित्त रहे तो निच्चीत ही हम अनेक रोगों से अपने आपको आसानी से बचा सकते हैं। मुस्कराने से जहाँ एक तरफ कार्यक्षमता बढ़ जाती है वहीं दूसरी तरफ सोच भी नकारात्मक के बजाय सकारात्मक हो जाती है। दूसरी बात अकारण भी मुस्कराने से तनाव, भय, चिंता, अशांति, स्वतः दूर भाग जाते हैं। प्रेम, मैत्री,आनन्द, प्रसन्नता बढ़ने लगती हैं। हंसने हंसाने वाला आदमी प्रतिकूलता और वियोग में भी समतामय जीवन जीता है। उसका चिन्तन सकारात्मक होने लगता है, सकारात्मक भाव पैदा होते हैं, जिससे शरीर के लिए उपयोगी रसायन पैदा होने लगते हैं। कार्य क्षमता बढ़ जाती है। अशान्ति की आग में आकुल-व्याकुल व्यक्ति के लिए हास्य एक वरदान होता है।
लाफ्टर से तन की शाररिक और मन की मानसिक थकान से छुटकारा पाया जा सकता है, शोधकर्ताओं ने मालूम किया है कि हार्दिक लाफ्टर से आदमी की मांसपेशियां 45 मिनट तक रिलेक्स रहती हैं | लाफ्टर शरीर की बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधात्म्क शक्ति को बडाता भी है हास्य चिकित्साशरीर में निःश्वास के साथ विजातीय तत्त्वों को विसर्जित करने का सरलतम उपाय है |

डा.जे.के. गर्ग
सन्दर्भ—–डॉ टी एस दराल, चंचल मल चोर्डिया, मेरी डायरी के पन्ने, विभिन पत्र पत्रिकाएँ

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