आने वाला कल अपना है

(अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर विशेष )

हिमानी पारीक
तुम भी पढ़ो , पढूँगी मैं भी ,
जीवन नया, गढूँगी मैं भी ।
मुझे बहुत आगे जाना है ,
प्रथम पंक्ति में ही आना है ।

नन्हीं हूँ फिर बड़ी बनूँगी ,
सबसे आगे खड़ी मिलूँगी ।
मैंने मन में ठान लिया है ,
जो सोचा वह पूर्ण किया है ।

लेना है हमको अँगड़ाई ,
बहुत बड़ा हथियार पढ़ाई ।
नई उड़ानें हमको भरना ,
अपनी मुश्किल ख़ुद हल करना ।

आज बालिका दिवस हमारा,
नभ में अरे ! गुंजा दो नारा ।
बेटी अनपढ़ नहीं रहेगी ,
भेदभाव को नहीं सहेगी ।

सीख लिया है हमनें पढ़ना ,
जान लिया ख़ुद आगे बढ़ना ।
हर लड़की का यह सपना है ,
आने वाला कल अपना है ।
– *हिमानी पारीक*,अध्यापिका
रा. उ.प्रा.विद्यालय, सूरजपुरा
श्रीनगर ( अजमेर )

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