*सुनो-सुनो, पेट्रोल-डीजल सस्ता हो गया है*

-थाली बजाओ, शंख बजाओ, दीप जलाओ, मंगलगीत गाओ
-हमारी केंद्र सरकार ने जनता के प्रति हमदर्दी दिखाई है

✍️प्रेम आनन्दकर, अजमेर।
👉पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला। पेट्रोल 9 .50 पैसे और डीजल 7 रुपए सस्ता, गैस सिलेंडर की कीमतों में भी होगी कमी। हर सिलेंडर पर मिल सकती है 200 रुपए की सब्सिडी। सरकार के इस निर्णय पर जनता-जनार्दन को थाली बजानी चाहिए, शंख बजाने चाहिए, दीप जलाने चाहिए। मंगलगीत गाने चाहिए। पिछले आठ साल से मदमस्त हाथी की तरह जनता को रौंदती चली आ रही सरकार के मन में जनता के प्रति अचानक इतनी दया और हमदर्दी कैसे जाग उठी, बड़ा ही विचारणीय प्रश्न है। राजस्थान में एक पुरानी कहावत है, “बोटी देर बकरा लेवो”, यानी छोटी-मोटी चीज या लालच देकर बड़ा मुनाफा कमाना या बड़ा मकसद हासिल करना। पेट्रोल-डीजल सौ रुपए से ऊपर और रसोई गैस सिलेंडर एक हजार रुपए से ऊपर जाने यानी आमजन की अच्छी-खासी कमर तोड़ने के बाद सरकार को एक्ससाइज ड्यूटी कम करने की सुध आई। मतलब सरकार ने अभी भी अपनी बेलगाम पेट्रोलियम कम्पनियों पर कोई लगाम लगाने की बात नहीं सोची है।

प्रेम आनंदकर
नतीजतन, यह कम्पनियां फिर अपने असली रूप में आ जाएं, कह नहीं सकते। अब भाजपाई छप्पन इंच का सीना चौड़ा कर कह सकते हैं कि मोदी है तो मुमकिन है। विपक्षी कांग्रेसी भी छाती ठोककर बोल सकते हैं कि उनके विरोध-प्रदर्शन के कारण सरकार झुकी है। हो सकता है कि ज्ञानवापी मसले से ध्यान हटाने और निकट आ रहे गुजरात विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार ने दाम घटाने का पैंतरा चला हो। बहरहाल, जो भी है, जनता को कुछ तो राहत मिल गई है। यह राहत और खुशी कितने दिन कायम रहेगी, यह भी आने वाला वक्त बताएगा। फिर सरकार इस थोड़े से लालच रूपी टुकड़े की एवज में कितना बड़ा बोझ जनता पर लादेगी या नहीं या फिर आगे चलकर और राहत देगी या नहीं, यह सब भविष्य में पता चलेगा। फिलहाल तो दस रुपए में राहत की सांस लो। देखो भाई, अब तो हमारी राजस्थान सरकार को भी वैट कम करके कांग्रेसियों को सीना तानकर चलने का मौका देना चाहिए। इससे दो फायदे होंगे। एक, भाजपाइयों को यह कहने का मौका नहीं मिलेगा कि अब तो राजस्थान की कांग्रेस सरकार को वैट कम करके जनता को और राहत देनी चाहिए। दूसरा, यदि कोई भाजपाई कुछ बोलता है तो कांग्रेसियों के पास जवाब हाजिर रहेगा। मतलब भाजपाई भी चुप, तो कांग्रेसी भी खुश। यदि राजस्थान सरकार वैट कम करती है तो कोई खुश हो या नहीं, जनता की तो बल्ले-बल्ले हो ही जाएगी। फिर सब मिलकर बोलेंगे, जनता-जनार्दन की जय।

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