पिता नीम का पेड़ !

हम कच्चे से है घड़े, और पिता कुम्हार !
ठोक पीट जो डांट से, हमको दे आकार !!
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सिर पे ठंडी छाँव-सा, पिता नीम का पेड़ !
कड़वा लगता है मगर, है जीवन की मेड़ !!
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पाई-पाई जोड़ता, पिता यहाँ दिन रात !
देता हैं औलाद को, खुशियों की सौगात !!
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पापा ही अभिमान है, पापा ही संसार !
नगपति से अविचल खड़े, पापा है आधार !!
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मन में भावों को भरे, पिता रहें गंभीर !
मां जैसा है प्यार लिए , किंतु अलग तस्वीर !!
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सूरज से होते पिता, लगते गरम जरूर !
अँधेरा सा छा उठे, अगर न हो ये नूर !!
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एक पिता के कर्ज को, समझे क्या संतान !
चुपचाप आँसूँ पिये, करता सब बलिदान !!
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रौनक इनसे ही जुड़ी, इनसे शोहरत शान !
साहस, ताकत है पिता, है मेरी पहचान !!
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✍डॉo सत्यवान सौरभ
रिसर्च स्कॉलर, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,
333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045
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