दिवाली: साकार करें मानव होना

हम सभी दिवाली मनाते हैं लेकिन दिवाली क्यों मनाई जाती है, कैसे मनाई जाती है और कब मनाई जाती है ,इससे जुड़े बहुत सारे आलेख और बहुत सारी जानकारी लगभग सभी जगह पर उपलब्ध है और कमोबेश सभी इस बारे में अच्छे से जानते हैं लेकिन इतनी सारी जानकारी होने के बावजूद और तकनीकी रूप से इतने सक्षम होने के बावजूद आज भी कहीं ना कहीं हम ठीक से दिवाली मना नहीं रहे हैं ,अब आप सोच रहे होंगे कि क्या वाकई में हम ठीक से दिवाली नहीं मना रहे और यदि नहीं मना रहे तो हमसे चूक कहाँ हो रही है? आज के इस ऑनलाइन शॉपिंग के युग में हम हर वस्तु कहीं ना कहीं ऑनलाइन खरीद रहे हैं या फिर बहुत सारे विज्ञापन भी दिखाये जाते हैं और मैं वाकई में उन विज्ञापनों को साधुवाद देती हूँ कि वह ऐसे ज्वलंत मुद्दों को उठाकर हमारे सामने प्रस्तुत करते हैं लेकिन उस सब के बावजूद आज भी आप यह सब देख सकते हैं कि हम ऐसी जगह पर जाकर मोल- भाव करते हैं जहां पर शायद वह मोल- भाव इतना मायने नहीं रखता। आज हम बहुत सारा पैसा खर्च कर बहुत सारी चीज़े घर के लिये लाते हैं लेकिन सब्जी वाले के पास, दीये वाले के पास , रिक्शा वाले के साथ, ई रिक्शा वाले के साथ …हम मोल- भाव करते हैं, शायद सही कहा जाता है कि जिसके आगे हमारा जोर चलता है ,उसी पर हम अपना जोर प्रदर्शित करते हैं। सेल के मार्केट में आपको किसी चीज को जिसका की वास्तविक मूल्य अगर ₹800 है वह आपको हजार रुपये बताकर 700 में दे दी जाये तो आप बड़े खुश होते हैं लेकिन वही कोई अगर आपको वास्तविक मूल्य बताकर ₹10 में दे रहा है तो उसमें भी आप ₹2 कम कर कर बहुत खुश होते हैं, इसके साथ-साथ एक और चीज बहुत महत्वपूर्ण है कि क्या हम वाकई में दूसरे के लिए दिवाली ला पा रहे हैं क्योंकि दिवाली का त्यौंहार रोशनी का दूसरा नाम है, जगमगाहट का दूसरा नाम है, इस दिन दीये जलाये जाते हैं, इस दिन खुशियाँ बरसाई जाती हैं, इस दिन त्यौंहार मनाया जाता है और हमारा देश जो कि इतना समृद्ध रहा है हमेशा से ही और जो मिलजुलकर रहना सिखाता है तो ऐसे में हम दिवाली के त्यौंहार पर क्यों ना एक ऐसी सूची तैयार करें जिसमें की हम अपने घर में अपनी सेवायें हमें देने वाले सभी लोगों को किसी न किसी रूप में ऐसी मदद करें कि यह दिवाली उनके घर में भी प्रकाश ले आये। आप अगर अपने आसपास नज़र दौड़ायेंगें तो बहुत सारे लोग ऐसे देखेंगेजिनके घर में शायद दीये में भरने के लिये घी और तेल भी नहीं लेकिन यकीन मानिये अगर यह लोग ना हो तो शायद हम सभी के जीवन में अंधेरा छा जायेगा। प्रकाश के अपने-अपने मायने होते हैं ,प्रकाश अपने-अपने रूप में हमारे आसपास फैल सकता है। किसी रोते हुये बच्चे को अगर आप हँसा सकते हैं तो यह भी प्रकाश पर्व है, किसी बीमार को अगर आप अच्छे स्वास्थ्य का आश्वासन दे सकते हैं तो यह भी प्रकाश ही है, किसी निरुत्साहित व्यक्ति के जीवन में अगर आप उत्साह का संचार कर सकते हैं तो यह भी दिवाली है। दिवाली सिर्फ एक दिन का प्रकाश पर्व नहीं है, दिवाली पूरे साल भर प्रकाश फैलाने का पर्व है और यकीन मानिये हम सभी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं। हम जैसा करते हैं वैसे ही हमसे हमारे बच्चे सीखते हैं, इसीलिये हम बच्चों को सिर्फ एक दिन दिवाली मनाना ना सिखाये, हम उन्हें साल भर की तैयारी करायें कि किस तरीके से साल भर थोड़ा-थोड़ा पैसा बचा कर, साल भर थोड़े-थोड़े अच्छे काम कर , दिवाली के दिन वे प्रकाश पर्व मना सकते हैं इससे न केवल वे बचत करना सीखेंगे बल्कि वे ये भी सीखेंगे कि उनकी की हुई छोटी सी बचत किस तरीके से किसी के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान ले आती है ।आईये,इस दिवाली हम सब यह प्रण लेते हैं कि हम अपने आसपास किन्हीं पाँच लोगों के चेहरों पर मुस्कान लायेंगे और फिर देखियेगा यह पाँच-दिवसीय प्रकाश का पर्व वाकई में हमारे आसपास के दायरे से फैलता हुआ जगमगाहट को पूरे समाज में फैला देगा, तो तैयार है आप?

डॉ. नेहा पारीक
जयपुर

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