नज़र वो भी नहीं आते जो करीब होते हैं

*वक्त* के सितम भी अजीब होते हैं
नजर वो भी नहीं आते जो करीब होते हैं

जिंदगी के जो हादसे समझ नहीं आते
दरअसल वो हमारे नसीब होते हैं

सिर्फ रुपए पैसे से जो अमीर होते हैं
हकीकतन उनमें से कई बड़े गरीब होते हैं

मतलबी दुनिया में जो वफा तलाशते हैं
वो बड़े बदनसीब होते हैं

शिद्दत से चाहने वाला कहीं भी हो ‘श्याम’
वो हरदम दिल के करीब होते हैं

– श्याम कुमार राई
‘सलुवावाला’

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