श्रीमती संतोष शर्मा
स्वतंत्र पत्रकार, साकेत नगर
भारतीय संस्कृति के अनेक रूप है। जिनमें धार्मिक आस्था का रंग भी एक है। कोई भी धर्म, सम्प्रदाय हो उनके त्यौहारों को यहां सभी मिल कर मनाते है। आपस में खुषियां बांटते है। ऐसा ही एक त्यौहार है क्रिसमस का, जो प्रतिवर्ष भारत सहित समस्त देषों में धूमधाम से मनाया जाता है। क्रिसमस केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा, शांति और मानवता का प्रतीक है। हर साल 25 दिसंबर को यह पर्व पूरी दुनिया में श्रद्धा, उल्लास और भाईचारे के साथ मनाया जाता है।
आज के समय में क्रिसमस गिफ्ट, मौज-मस्त और छुट्टी का उत्सव बन चुका है, लेकिन इसकी जड़ें गिरजाघर, आस्था और विश्वास से जुड़ी हैं। क्रिसमस डे ईसाई धर्म का सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहार माना जाता है। यह तो सभी जानते हैं कि क्रिसमस डे ईसा मसीह के जन्म की याद में मनाया जाता है। इस दिन चर्चों में प्रार्थनाएं होती हैं, घर सजाए जाते हैं और लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। लेकिन क्रिसमस के पीछे गहरा धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है, जो अंधकार पर प्रकाश का संदेश देता है। भारत जैसे बहुधार्मिक देश में भी यह पर्व सभी समुदायों द्वारा मिल-जुलकर मनाया जाता है।
क्रिसमस ईसा मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। ईसाई मान्यता के अनुसार, ईसा मसीह ईश्वर के पुत्र थे और उन्हें मानवता का उद्धारकर्ता माना जाता है। उन्होंने प्रेम, क्षमा, सेवा और त्याग का मार्ग दिखाया। उनके जीवन और उपदेशों की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है, ताकि समाज में करुणा और भाईचारे का भाव बना रहे। क्रिसमस से 12 दिन के उत्सव क्रिसमसटाइड की भी शुरुआत होती है। एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म 7 से 2 ई.पू. के बीच हुआ था। आधुनिक क्रिसमस की छुट्टियों मे एक दूसरे को उपहार देना, चर्च में समारोह और विभिन्न सजावट करना शामिल हैं। इस सजावट के प्रदर्शन में क्रिसमस का पेड़, रंग बिरंगी रोशनियाँ, बंडा, जन्म के झाँकी और हॉली आदि शामिल हैं। सांता क्लॉज (जिसे क्रिसमस का पिता भी कहा जाता है हालांकि, दोनों का मूल भिन्न है) क्रिसमस से जुड़ी एक लोकप्रिय पौराणिक शख्सियत है जिसे अक्सर क्रिसमस पर बच्चों के लिए उपहार लाने के साथ जोड़ा जाता है।
वैसे तो हर साल 25 दिसंबर को बड़ी धूमधाम से क्रिसमस फेस्टवल मनाया जाता है, लेकिन बाइबिल में ईसा मसीह की सटीक जन्मतिथि का कोई जिक्र नहीं मिलता। इतिहासकारों के अनुसार, रोमन साम्राज्य में 25 दिसंबर को सूर्य देव का पर्व मनाया जाता था। यह समय शीत अयनांत के आसपास होता है, जब दिन बड़े होने लगते हैं। चौथी शताब्दी में गिरजाघर ने ईसा मसीह के जन्मदिवस को 25 दिसंबर से जोड़ दिया, ताकि सूर्य के प्रकाश के पर्व को आध्यात्मिक प्रकाश यानी कि अंधकार के बाद प्रकाश का प्रतीक के तौर पर बनाया जा सके।
क्रिसमस को पहली बार औपचारिक रूप से चौथी शताब्दी में रोम में मनाया गया। इसका पहला लिखित उल्लेख 36 ईस्वी में मिलता है। इसके बाद यह उत्सव समय के साथ यूरोप और फिर पूरी दुनिया में फैलता चला गया। भारत में क्रिसमस का आगमन पुर्तगाली और ब्रिटिश मिशनरियों के साथ हुआ, जिसकी शुरुआत गोवा, केरल और पूर्वोत्तर राज्यों से मानी जाती है।
क्रिसमस के दिन लोग चर्च जाकर विशेष प्रार्थनाएं करते हैं। कैरोल गाए जाते हैं, घरों और चर्चों में रोशनी और सजावट की जाती है। ईसा मसीह के जन्म की खुशी में गाए जाने वाले गीतों को कैरोल्स कहा जाता है। इस शुभ अवसर पर क्रिसमस ट्री सजाना, केक काटना और एक-दूसरे को उपहार देना इस पर्व की खास परंपराएं हैं। सांता क्लॉज बच्चों के लिए खुशी और उपहारों का प्रतीक माने जाते हैं।
क्रिसमस को आजकल सभी ईसाई धर्म के लोगों के साथ कई गैर ईसाई लोग भी इसे सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाते हैं। क्रिसमस के दौरान उपहारों का आदान प्रदान, सजावट का सामान और छुट्टी के दौरान मौजमस्ती के कारण यह एक बड़ी आर्थिक गतिविधि बन गया है और अधिकांश खुदरा विक्रेताओं के लिए इसका आना एक बड़ी खुशखबरी है।
दुनिया भर के अधिकतर देशों में यह 25 दिसम्बर को मनाया जाता है। क्रिसमस की पूर्व संध्या यानि 24 दिसम्बर को ही जर्मनी तथा कुछ अन्य देशों में इससे जुड़े समारोह शुरु हो जाते हैं। ब्रिटेन और अन्य राष्ट्रमंडल देशों में क्रिसमस से अगला दिन यानि 26 दिसम्बर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। कुछ कैथोलिक देशों में इसे सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ सेंट स्टीफेंस भी कहते हैं। आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च 6 जनवरी को क्रिसमस मनाता है पूर्वी परंपरागत गिरिजा जो जुलियन कैलेंडर को मानता है वो जुलियन वेर्सिओं के अनुसार 25 दिसम्बर को क्रिसमस मनाता है।
क्रिसमस केवल उत्सव नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों की मदद, दान और सेवा का भी दिन है। यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रेम और करुणा से समाज को बेहतर बनाया जा सकता है। यही कारण है कि क्रिसमस आज पूरी दुनिया में शांति और मानवता के संदेश के साथ मनाया जाता है।