*हर युवा देश की ताकत है। तुम जो भी करोगे, वह भारत को नया स्वरूप देगा – स्वामी विवेकानंद*

स्वामी विवेकानंद जयंती पर विशेष लेख
*उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो – स्वामी विवेकानंद*
जितेन्द्र गौड़

स्वामी विवेकानंद के विचार जीवन में सफलता के मूलमंत्र है। उन्होंने अपने जीवन-काल में युवाओं के लिए कई महत्वपूर्ण विचार प्रकट किए, जिनके माध्यम से युवा सफलता की सीढ़ियां चढ़ सकता है। उनका सबसे अनमोल वचन या विचार “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए” है। जो युवाओं में जोश और प्रेरणा का संचार करता है। स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो युवाओं को प्रेरणा देते थे और मानवता के उत्थान के लिए कार्य करते थे।

उनके 12 जनवरी स्वामी विवेकानंद जन्मदिन पर देशभर के साथ साथ विदेशों भी में अनेक कार्यक्रम होते हैं, जिनके माध्यम से युवाओं को उनके अनमोल वचन या विचार बताए जाते हैं। उन्होंने बताया कि आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक नहीं है, यह आंतरिक शक्ति और आत्मज्ञान पर जोर देता है। स्वामी विवेकानंद ने अपने विचारों से विदेशों में पहचान बनाई, जो आज भी है। उन्होंने विदेशों के सम्मेलनों में भाग लेकर देश का नाम रोशन किया था। उन्होंने 1893 में शिकागो में  विश्व धर्म संसद में दिए गए ” मेरे अमेरिका के बहनों और भाइयों” भाषण ने उन्हें विश्व प्रसिद्ध बना दिया। स्वामी जी ने कहा, ‘मुझे गर्व है कि मैं उस देश से हूं जिसने सभी धर्मों को शरण दी है। मुझे गर्व है कि मैं ऐसे धर्म से हूं, जिसने पूरी दुनिया को सहिष्णुता औऱ सार्वभौमिक स्वीकृति का ज्ञान दिया। हम विश्व के सभी धर्मों को बराबर सम्मान देते हैं।
*स्वामी विवेकानंद के चरित्र निर्माण एवं शिक्षा के विचार*
स्वामी विवेकानंद ने शिक्षा को जीवन में महत्वपूर्ण बताया कि शिक्षा जहां से – जैसी मिले – वैसी ग्रहण करना चाहिए, शिक्षा को‌ उन्होंने किताबों तक सीमित नहीं माना। किताबी ज्ञान वाली शिक्षा के अलावा व्यवहार, समझदारी, व्यवसाय, चरित्र निर्माण आदि के लिए भी शिक्षा का होना जरूरी है। उनका कहना था कि वास्तविक शिक्षा वहीं है,जो चरित्र का निर्माण करें और आत्मनिर्भर बनाएं। वह चाहते थे कि युवा केवल नौकरी की तलाश करने वाले ना बने, बल्कि समाज को दिशा और नौकरी देने वाले बनें।  उनके विचारों के अनुसार मजबूत चरित्र, नैतिक मूल्यों और अनुशासन के बिना सफलता अधूरी है। इसलिए उन्होंने शिक्षा को आत्मविकास और समाज सेवा से जोड़ा, जो उनके विचार आज के दौर में भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा से जुड़ना आवश्यक है, जो जीवन एवं चरित्र निर्माण में सहायक होती है।
*दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प की आवश्यकता*
स्वामी विवेकानंद भारत के एक ऐसे महान विचारक और संत हैं, जिन्होंने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को अपने विचारों के माध्यम से नई दिशा दी थी। स्वामी का यह मानना था कि व्यक्ति अपने जीवन में कुछ भी प्राप्त कर सकता है, बस उसके पास दृढ़ इच्छाशक्ति और कर्मठता की आवश्यकता होती है। उनके अनमोल विचार आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए है। युवाओं ने उनके विचारों को अपने जीवन में अपनाकर सफलता प्राप्त की है। विवेकानंद ने हिन्दू धर्म को विश्व पटल पर एक नई पहचान दिलाई, उन्होंने हिन्दू धर्म को एक सार्वभौमिक धर्म के रूप में प्रस्तुत किया और बताया कि हिन्दू धर्म केवल एक धर्म नहीं बल्कि एक जीवन जीने का तरीका है।  उनके विचार पढ़ने से ही जीवन में एक नई ऊर्जा का संचार पैदा होता है।  उनके जीवन की कार्यशैली अनेक प्रकार से भिन्न थी। वह नित नियम से कार्य करते थे, प्रतिदिन नए नए विचार प्रकट करके उनको जीवन में अपनाते थे। उनकी इच्छाशक्ति मजबूत थी। उनके तीन नियम थे, पहला जो आपकी मदद कर रहा है, उसे मत भूलो। दूसरा जो आप पर विश्वास कर रहा है, उसे धोखा मत दो। तीसरा जो आपसे प्यार कर रहा है, उससे नफ़रत मत करों।
*स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार*
* “उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए”। यह विचार युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है, कि वे अपने उद्देश्य पर अडिग रहे।
*  “जिस दिन आपके सामने कोई समस्या न आए, आप मान सकते हो कि आप ग़लत रास्ते पर चल रहे हैं”। यह विचार बाधाओं को विकास का अवसर मानता है।
* “पहले हर अच्छी बात का मज़ाक बनता है, फिर विरोध होता है, अंत में उसे स्वीकार कर लिया जाता है”। यह विचार नवाचार और बदलाव के प्रति समाज के आइने को दर्शाता है।
* “तुम्हें कोई पढ़ा नहीं सकता, कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता। तुमको सबकुछ खुद अंदर से सीखना है, आत्मा से अच्छा कोई शिक्षक नहीं है”। यह स्वामी विवेकानंद का विचार आंतरिक शक्ति और आत्मज्ञान पर जोर देता है।
* “एक विचार लो, उसे अपनी जिंदगी बना लो, उसी विचार के बारे में सोचों, सपने देखो, उसी विचार पर जिओ”। यह विचार एकाग्रता और लक्ष्य केंद्रित जीवन का मार्ग बताता है।
* “शक्ति जीवन है, निर्बलता मृत्यु है। विस्तार जीवन है, संकुचन मृत्यु है। प्रेम जीवन है, द्वेष मृत्यु है “। यह विचार सकारात्मकता और शक्ति के महत्व को दर्शाता है।
* “ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी है, वो हम ही हैं,जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है “। यह विचार बताता है कि समाधान बाहर नहीं है, हमारे भीतर ही हैं।
* “जब तक आप स्वयं पर‌ विश्वास नहीं करेंगे तक तक आप ईश्वर पर विश्वास नहीं कर सकते “। यह विचार आत्मविश्वास को आध्यात्मिक उन्नति की पहली सीढ़ी बताता है।
* “सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा”। यह विचार सत्य की बहुआयामी प्रकृति को दर्शाता है।
*गरीब एवं जरूरतमंद ईश्वरीय सेवा*
स्वामी विवेकानंद के विचार वेदांत दर्शन पर आधारित थे। वो गरीब एवं जरूरतमंद की सेवा को‌ ईश्वर की सेवा करना मानते थे। वह मानते थे कि हर व्यक्ति के अंदर शक्ति और अच्छाई मौजूद हैं। साधना का उद्देश्य उसी शक्ति को जाग्रत करना है। उनके लिए धर्म का मतलब केवल पूजा या कर्मकांड करना नहीं था, बल्कि अच्छा जीवन जीने का तरीका था, वो सभी धर्मों का सम्मान करते थे और आपसी समझ पर जोर देते थे। उन्होंने आध्यात्मिकता को समाज सेवा से जोड़ा। वह समाज सेवा के लिए तत्पर रहते थे। उन्होंने अपने जीवन काल में समाज सेवा – देश सेवा करके लोगों को प्रेरित करने का कार्य किया। विवेकानंद गरीबी को हर समस्या का मूल मानते थे और शिक्षा, कृषि एवं उद्योगों के माध्यम से इसका समाधान चाहते थे। उन्होंने शिक्षा और आर्थिक विकास के माध्यम से गरीबों के उत्थान पर जोर दिया, क्योंकि उनका मानना था कि गरीबों की दुर्दशा राष्ट्र की रीढ़ को कमजोर करती है और हर समस्या की जड़ है। उन्होंने नर सेवा को ही नारायण की सेवा माना है और इसी सिद्धांत पर कार्य किया। उनका मानना था कि जब तक गरीबों का उत्थान नहीं होगा तब तक राष्ट्र का विकास अधूरा है। वे राष्ट्र की रीढ़ है, उनके श्रम से ही देश चलता है।
*युवाओं को समर्पित जीवन*
स्वामी विवेकानंद का जीवन युवाओं को अधिक समर्पित रहा। उन्होंने अपने जीवन में युवाओं के लिए अधिक कार्य किया, वो हर समय युवाओं में बदलाव की चाहत रखते थे, उनका मानना था कि युवा शक्ति, जोश, समर्पण आदि से हर कार्य सफल होता है। युवाओं में कुछ करने की चेष्टा रहतीं हैं, जब युवा शक्ति ठान लें कि कोई भी कार्य हमें पूरा करना है,तो वह युवा शक्ति पूरा कर सकतीं हैं, इसके लिए कर्मठता होना आवश्यक है। युवा नई क्रांति पैदा कर सकता है। युवाओं ने देशहित में कई आंदोलन किए जो बदलाव की बहार लाएं। जो आज भी SVYM जैसे संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका क्षेत्र में कार्य करते हुए ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं, जो विवेकानंद के आदर्शों का प्रतीक है।  स्वामी विवेकानंद ने भारतीय युवाओं को आत्मविश्वास, अनुशासन और राष्ट्र-निर्माण की शक्ति का अहसास कराया, उन्हें निष्क्रियता छोड़कर उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत का संदेश देकर प्रेरित किया, जिससे युवा अपने भीतर की शक्ति को पहचानकर देश के विकास में सक्रिय भागीदार बनें और मानसिक, शारीरिक, आध्यात्मिक रूप से सशक्त होकर सामाजिक बदलाव ला सकें। स्वामी विवेकानंद युवाओं में आशा और उम्मीद की किरण देखते थे, जो सत्य है, परिवर्तन लाने के लिए।
–  जितेन्द्र गौड़
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