
बहुत खुश होगा दुनिया बनाने वाला।
बहुत रोया सबको हंसाने वाला।।
मुद्दत से ढूंढ रहे यार हम अपनों को।
काश वो मिल जाए रिश्ते बनाने वाला।।
केसे गुजरे हैं मेरे शाम ओ सहर।
काश जान भी ले सच सितम ढाने वाला।।
बेवफा कहकर जो रुसवा करता रहा।
मिलना नही हम सा उसे निभाने वाला।।
पग पग पर खाई ठोकर जिसने हरदम।
मिलना न उससे अच्छा सिखाने वाला।।
मजे में हैं वो जो छोड़ गया सबको।
रुलाएगा याद में दूर जाने वाला।।
दुनिया के रंजो गम से चूर को कभी।
मिलता मनहर सीने से लगाने वाला।।
अपनी ही शे से परेशान हैं मधुकर।
काश मिल जाए दरवेश बचाने वाला।।
गीतकार मनोहर मधुकर