सेवादल संस्थापक डॉ एन एस हार्डिकर जी की 137वी जयन्ती पर विशेष

अजमेर 7 मई (    ) कांग्रेस सेवादल के संस्थापक डॉ नारायण सुब्बाराव जी हार्डिकर की 137वी जयन्ती के अवसर पर पुरे भारत वर्ष में कांग्रेस सेवादल के साथी उन्हें श्रद्धाभाव से याद कर उनके बताये रास्तों पर चलने का संकल्प ले रहे हैं l
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस सेवादल के प्रदेश मुख्य प्रशिक्षक पूर्व पार्षद शैलेंद्र अग्रवाल ने उनकी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि डॉ नारायण सुब्बाराव जी हार्डिकर जी का जन्म 7 मई 1889 कर्नाटक रत्नगिरी के हार्डि नामक गांव में हुआ था l 1904 में इनके पिता तथा भाई की मृत्यु हो गयी तो बाल्यकाल में अपनी माँ के साथ इन्हे हुबली में अपने मौसाजी के यहाँ रहना पड़ा तथा यहीं इनकी शिक्षा हुई l
1906 में डॉक्टरी इलाज एवं दवाइयों के अभाव में डॉ हार्डिकर जी की माता की मृत्यु हो गयी इस घटना से आहत होकर हार्डिकर जी ने डॉक्टर बनने की ठान ली और 1909 में वे कलकत्ता चले गये l 1909 से 1913 तक डॉक्टरी का अध्ययन कर उन्होंने डॉक्टरी की उपाधि ली तथा उच्च अध्ययन के लिए वे अमेरिका चले गये l अमेरीका में रहकर डॉक्टरी व्यवसाय में गहरा अध्ययन करने लगे, उन्होंने बर्तन मांजने से लेकर विश्वविद्यालय में व्याख्याता तक का कार्य किया l उन्हीं दिनों में हार्डिकर जी का संपर्क लाला लाजपत राय जी  हुआ और उन्होंने उनके साथ रहकर यंग इंडिया समाचार के सेक्रेटरी और प्रबंधक के पद पर कार्य किया और अमेरिका में होम रूल लीग के सेक्रेटरी हो गये l लाला लाजपत राय ने उन्हें भारत में गांधीजी से मिलने की सलाह दी l डॉ हार्डिकर जी के मन में भारतवासियों के प्रति अथाह प्रेम था इससे अभिभुत होकर उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने का संकल्प ले लिया वे 1921 में अमेरिका से भारत लौट आये l उन्हीं दिनों नागपुर में सत्याग्रह आंदोलन हेतु जेल भरो अभियान चल रहा था, डॉ हार्डिकर जी भी कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस सचिव रहते हुए नागपुर में बंदी रहे l वहाँ पर इनकी मुलाकात नीलकंठ शबनी देशमुख, जनरल अवाडी मोहनलाल पंडिया, महात्मा भगवान दीन, आबिद अली, डॉ चंदुलाल, मनीलाल देसाई आदि से हो गयी उस समय एक ऐसे युवा स्वयंसेवकों के संगठन की आवश्यकता थी जो देश के लिए मर मिटने को तैयार हो, इन सभी नेताओं ने आपस में चर्चा की l

शैलेंद्र अग्रवाल

3 सितंबर 1921 को सभी कैदियों को जेल से रिहा कर दिया गया l 1923 में दिल्ली में कांग्रेस का विशेष अधिवेशन बुलाया गया, इस कॉन्फेंस में 12 राज्यों के 80 प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा यह निर्णय लिया कि सारे देश में एक अनुशासित एवं संगठित स्वयंसेवकों का संगठन तैयार किया जाये तथा सभी अपने अपने राज्य में यह कार्य तेजी से शुरू कर संगठन को मजबूत करेंगे l इस संगठन का स्वरूप स्वतंत्र रहेगा परंतु यह संगठन कांग्रेस के लिए कार्य करेगा l फिर 1923 में काकीनाडा में कांग्रेस का महाअधिवेशन हुआ जिसमें संगठन के स्वयंसेवकों के चयन से लेकर प्रशिक्षण की संपूर्ण जिम्मेदारी नेहरू जी ने डॉ हार्डिकर जी के उप्पर डाल दी, इस संगठन का नाम राष्ट्र सेवा मंडल से बदलकर हिंदुस्तानी सेवादल रख दिया l जिस पौधे को नेहरू जी व हार्डिकर जी ने लगाया वह आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप धारण कर अपने 103वे वर्ष में चल रहा है l
डॉ हार्डिकर जी ने अपने जीवन में कई संस्थाओं में कार्य किये जिनमें मुख्य रूप से तिलक कन्या महाविद्यालय पूना, राष्ट्र सेवादल, हिंदुस्तानी सेवादल, कर्नाटक हेल्थ इंस्टिट्यूशन घटप्रभा आदि शामिल हैं 1923 से लेकर 1947 तक हार्डिकर जी निर्माण प्रक्रिया में लगे रहे l
डॉ एन एस हार्डिकर जी 1952 से 1962 तक राज्यसभा के सदस्य भी रहे उन्हे भारत सरकार द्वारा श्रेष्ठ कार्यो के लिए 1960 में पदम श्री से सम्मानित भी किया गया था l राज्यसभा से सेवानिर्वत होकर डॉ हार्डिकर जी पूर्ण शक्ति के साथ अपनी कर्नाटक हैल्थ इंस्टिट्यूट घटप्रभा में लग गये l
सेवादल के जन्मदाता डॉ नारायण सुब्बाराव हार्डिकर जी ने अपने जीवन में बहुत कठोर परिश्रम किया l 26 अगस्त 1975 को डॉ हार्डिकर जी का घटप्रभा कर्नाटक में स्वर्गवास हो गया l ऐसे वीर सपूतों को सेवादल परिवार व कांग्रेसजन शत् शत् नमन करते हैं जिन्होंने देश के लिए मर मिटने की कसम खाई हो l

शैलेंद्र अग्रवाल, पूर्व पार्षद
प्रदेश मुख्य प्रशिक्षक
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस सेवादल
9414280862,7891884488

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