
मैं जब सर्विस में था तब की बात है। राज्य कर्मचारियों की हड़ताल चल रही थी। कांग्रेस का शासन था और भैरों सिंह शेखावत विपक्ष के नेता थे। भैरों सिंह जी ने कहा कि यह वह सरकार है, जो 100 प्याज भी खायेगी और 100 जूते भी खायेगी। फिर उन्होंने उसको विस्तार से बताया कि एक बार दो लोगों में शर्त लगी यह कि आप क्या सो प्याज खा सकते हो तो उसने हां भर ली, मैं खा सकता हूं। अगर नहीं खाए तो आपको 100 जूते खाने पड़ेंगे। बहरहाल, उसने प्याज खाना शुरू किया। दस प्याज खाने के बाद में उसने मना कर दिया कि मेरे को आंखों में बहुत ज्यादा जलन हो रही है और आंसू आ रहे हैं। मैं प्याज नहीं खा सकता, तो शर्त लगाने वाले ने कहा कि शर्त के अनुसार जूते खाओ। जूते मारना शुरू किया तो 10 जूते खाने के बाद कहा मुझे जूते की मार बर्दाश्त नहीं हो रही, मैं प्याज खा लूंगा, फिर दस प्याज खाये, फिर मना कर दिया और, वापस 10 जूते खाए और फिर कहने लगा मैं जूते नहीं खा सकता, मैं प्याज खाने की कोशिश करता हूं, इस तरह से 10 जूते और 10 प्याज, फिर 10 जूते और फिर 10 प्याज। 100 जूते भी खाये और 100 प्याज भी खाये। यह सरकार कर्मचारियों की मांगों को मानेगी, लेकिन 100 जूते और 100 प्याज खाने के बाद।
इसी तरह से 36-37 दिन हो गए कॉकरोच जनता पार्टी को। रोज सरकार को बुरा भला सुनते तब 47 नौकरी से निकला गया, दो लोगों को पहले हटा चुके हैं, और अब धर्मेंन्द्र प्रधान का इस्तीफा। इस तरह के निर्णय शुरुआत में लेते तो आंदोलन इतना लंबा और विवाद इतना बडा नहीं होता, न संसद में कार्रवाई ठप होती। अब मुझे वह बात याद आती है कि 100 जूते भी खाएंगे और 100 प्याज भी खाएंगे।
-कमल गर्ग