
मूल लेखक: प्रोफ़ेसर अशरफ़ रहमान
हिंदी अनुवाद-देवी नागरानी
मूल लेखक: प्रोफ़ेसर अशरफ़ रहमान
پروفیسر اشرف راہموں
سَرحد کے اُس پار
سَرحد کے اُس پار
میرے بزرگ سَرحد کے اُس پار سے آئے تھے،
وہ کیا چھوڑ کر آئے تھے ؛
تم کیا جانو؟
تمہیں اِس سے کوئ غرض نہیں ہو سکتی —
تم نے اُن کو مذہب ،محرومی اور بالآخر موت ہی
دی۔۔۔
سَرحد کے اُس پار سب کچھ اُن کا تھا
لیکن سب کچھ مٹ گیا ۔۔۔
کھیتوں میں کھڑے بوڑھے نیم کے درخت،
آخری شب کو تب روئے تھے ۔۔۔
یہ وہ ہی شب تھی جب ؛
وطن کے وارث مُسافر ہوئے تھے–
وہ گاؤں جہاں لوگ کم
محبت کی باتیں زیادہ ہوا کرتی تھیں–
پھر اپنوں سے دُور ہوئے تو دھرتی بھی چھن
گئی!!!
سَرحد کے اُس پار اُن کے گھر تھے،
گھروں کا آسمان بھی اُن ہی کا تھا،
آج بھی وہ ستارے مکینوں کو یاد کرتے ہیں۔۔۔
سَرحد کے اُس پار پیڑ کا درخت آج بھی موجود ہے،
پرندے آج بھی آتے ہیں،
بس وہ بوڑھا شخص اور اونٹ کہیں کھو گیا ہے!!!
تم نے سَرحد بانٹی ، مگر کبھی دکھ نہیں بانٹے- – –
سارے شکوے اپنی جگہ،
تم نے پیار تو سیکھا ہی نہیں تھا؟؟
تم نے بٹوارے کو فوقیت دی،
تم نے تقسیم جو کرنا تھا- – –
سَرحد کے اُس پار چند بوڑھے لوگ ، گزرگاہیں
اور لاوارث قبریں باقی ہیں–
چلو! سَرحد کے اُس پار چلتے ہیں
پُرانی یادوں کا بوجھ لے کر ،،
وطن کے بوڑھے پرندے تو ضرور ہونگے—
ٹوٹے ہوئے مکانوں کی مٹی کو چوم آتے ہیں – –
سَرحد کے اُس پار کچھ پیار باقی ہے!!
ٹوٹے ہوئے دیش کا کچھ اختیار باقی ہے – – –
हिंदी लिप्यांतर: देवी नागरानी
सीमा के उस पार:
मेरे बुज़ुर्ग सीमा के उस पार से आए थे,
वे क्या पीछे छोड़ आए;
आप क्या जानते हैं?
आपको इसमें कोई दिलचस्पी नहीं हो सकती —
आपने उन्हें धर्म, अभाव और आख़िर में मौत दी.
सीमा के उस पार सब कुछ उनका था
लेकिन सब कुछ मिटा दिया गया…
खेतों में खड़े पुराने नीम के पेड़,
आख़िरी रात रोए थे…
यह वही रात थी जब;
वतन के वारिसों ने सफ़र किया था–
वह गाँव जहाँ लोग कम बातें करते थे
और प्यार ज़्यादा करते थे–
फिर जब वे अपनों से दूर हुए, तो ज़मीन भी छीन ली गई!!!
उनके घर सीमा के उस पार थे,
उनके घरों का आसमान भी उनका था,
आज भी वे तारे वहाँ रहने वालों को याद करते हैं…
सीमा के उस पार वह पेड़ आज भी मौजूद है,
पक्षी आज भी आते हैं,
लेकिन वह बूढ़ा आदमी और ऊँट कहीं खो गए हैं!!!
आपने सीमा तो बाँट दी, लेकिन कभी दुख नहीं बाँटे- – –
सारी शिकायतें अपनी जगह हैं,
क्या आपने प्यार करना नहीं सीखा?
आपने बँटवारे को प्राथमिकता दी,
आपने वह सब बाँट दिया जो बाँटा जाना था- – –
कुछ बूढ़े लोग, रास्ते
और वीरान कब्रें सीमा के उस पार रह गई हैं–
आइए! हम पुरानी यादों का बोझ उठाए
सीमा के उस पार चलें,,
वतन के पुराने पक्षी ज़रूर होंगे वहाँ—
हम टूटे हुए घरों की मिट्टी को चूमने आते हैं – –
सीमा के उस पार थोड़ा प्यार अभी भी बचा है!!
टूटे हुए देश में अभी भी कुछ ताक़त बाकी है – –
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