ई.एफ.आर. की 120 वर्षों की गौरवगाथा

वफादारी और बहादुरी की अमिट मिसाल
पश्चिम बंगाल की सबसे पुरानी और गौरवशाली बटालियनों में से एक ईस्टर्न फ्रंटियर राइफल्स (ई.एफ.आर.) की पहचान देश के प्रति निस्वार्थ समर्पण, अनुशासन, वफादारी और अदम्य बहादुरी से रही है। इस बटालियन ने अपने गौरवशाली सफर में ऐसे अनेक अध्याय लिखे हैं, जिन्हें इतिहास के पन्नों से कभी मिटाया नहीं जा सकता।
1 नवंबर 2026 ईस्टर्न फ्रंटियर राइफल्स की प्रथम बटालियन के लिए अत्यंत विशेष और गौरवपूर्ण दिन है। इस दिन बटालियन ने अपने 120वें स्थापना वर्ष में प्रवेश किया। यह केवल एक स्थापना दिवस नहीं, बल्कि 120 वर्षों की उस गौरवशाली यात्रा का उत्सव है, जिसमें अनुशासन, त्याग, बलिदान, देशभक्ति, वफादारी और बहादुरी की अनगिनत कहानियां समाई हुई हैं।
इन 120 वर्षों में ई.एफ.आर. के जवानों ने अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानते हुए देश और समाज की सुरक्षा के लिए पूरी निष्ठा से सेवा की है। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने दायित्व से पीछे नहीं हटना और राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखना इस बल की विशेष पहचान रही है।
आज जब ई.एफ.आर. प्रथम बटालियन अपने 120वें वर्ष में प्रवेश कर रही है, तो वर्तमान में देश की सेवा में पूरी तत्परता से जुटे प्रत्येक जवान को हृदय से सम्मान और सलाम करने का अवसर है। साथ ही उन सभी पूर्व जवानों को भी शत-शत नमन, जिन्होंने अपने परिश्रम, पसीने, साहस और त्याग से इस गौरवशाली बटालियन की नींव को मजबूत किया।
किसी भी सैन्य बल की असली ताकत केवल उसकी वर्दी या हथियारों में नहीं होती, बल्कि उसके जवानों के साहस, अनुशासन और मातृभूमि के प्रति अटूट निष्ठा में होती है। ई.एफ.आर. ने इस भावना को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखा है।
120 वर्षों की यह यात्रा हमें यह संदेश देती है कि समय बदल सकता है, परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन मातृभूमि के प्रति सच्ची वफादारी और कर्तव्य के प्रति समर्पण कभी नहीं बदलता।
ई.एफ.आर. के वर्तमान जवानों को सलाम और उन सभी वीर पूर्व जवानों को नमन, जिन्होंने इस गौरवशाली इतिहास को अपने कर्म और बलिदान से रचा।
ई.एफ.आर. के जवानों के नाम चार पंक्तियां
ई.एफ.आर. के जवानों की क्या मिसाल दूं,
डरते नहीं मौत से, दुश्मनों से भिड़ जाते हैं।
सर झुकाना सीखा नहीं दुश्मनों के आगे कभी,
बल्कि शहीद होकर नाम लहू से लिख जाते हैं।
जय हिंद!
जय ई.एफ.आर.!
लेखक : अवकाश प्राप्त हवलदार
श्री गोपाल नेवार
ई.एफ.आर. प्रथम बटालियन, सालुवा, खड़गपुर, पश्चिम बंगाल

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