नई दिल्ली। कोरियाई प्रायद्वीप में स्थिति हर दिन और गंभीर होती जा रही है। उत्तर और दक्षिण कोरिया के गरमागरम माहौल में अमेरिका भी कूद चुका है। उत्तर कोरिया का समर्थन चीन तो दक्षिण कोरिया के लिए अमेरिका हर मदद को तैयार रहता है। अब आलम यह है कि उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच युद्ध सा माहौल बना हुआ है। उत्तर कोरिया लगातार दक्षिण कोरिया समेत अमेरिका पर भी परमाणु हमले की धमकी दे रहा है।
अमेरिका और चीन की टशन भी किसी से छुपी नहीं है। आपको बता दें कि उत्तर कोरिया के पक्ष में चीन हमेशा खड़ा रहता है। दोनों साम्यवादी देश हैं और उत्तर कोरिया अभी तक पूरी तरह से चीन पर निर्भर रहता है। बताया जाता है कि चीन न केवल आर्थिक रूप से बल्कि सैन्य जरूरतों के लिए भी चीन पर निर्भर रहता है। उत्तर कोरिया के विवादित परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी चीन हमेशा उत्तर कोरिया के साथ खड़ा रहा है। मौजूदा विवाद के बाद जब अमेरिका ने अपनी सेना को सतर्क किया तो चीन ने भी अपनी सेना को अलर्ट कर दिया है। उत्तर कोरिया ने 12 फरवरी को तीसरा परमाणु परीक्षण किया था, जिसके बाद कोरियाई द्वीप में तनाव बढ़ गया था। लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि उत्तर कोरिया के नजदीकी सहयोगी चीन ने रिएक्टर दोबारा खोलने की घोषणा की निंदा की है। इतना ही नहीं तीसरा परमाणु परीक्षण करने के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से उत्तर कोरिया के खिलाफ नए सिरे से प्रतिबंध लगाए जाने की मंजूरी दे दी। उत्तरी कोरिया 2006 और 2009 में भी दो बार परमाणु परीक्षण कर चुका है।
आपको बता दें कि प्रतिबंध के बाद उत्तर कोरिया और भड़क गया। इसके बाद उसने 2007 से बंद प्लूटोनियम रिएक्टर को खोलने की घोषणा कर दी। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने 1986 में प्लूटोनियम रिएक्टर शुरू किया था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव में 2007 में इसे बंद कर दिया गया था। इस घोषणा के बाद सियोल और वाशिंगटन की धड़कनें और बढ़ गई हैं। और तीनों देशों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। उत्तर कोरिया ने कोरियाई युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ किए गए समझौते को भी रद्द कर दिया है। साथ ही अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ अपनी हॉटलाइन बंद कर दी है। दक्षिण कोरिया की प्रथम महिला राष्ट्रपति पार्क ग्युन हिउ ने भी चेतावनी दी है कि अगर उत्तर कोरिया ने कोई भी उकसावे वाला कदम उठाया तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।
इस बीच विशेषज्ञों ने कहा है कि उत्तर कोरिया को अमेरिका तक मार करने वाली परमाणु मिसाइल बनाने में अभी सालों लग जाएंगे। उत्तर कोरिया के नेता प्योंगयांग की धमकियों को विशेषज्ञ शस्त्र निरस्त्रीकरण के बदले पैसा हासिल करने की मुहिम करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि दबाव की राजनीति बनाकर उत्तर कोरिया विदेशी मदद की मांग करेगा।